अब डीएमएफ की 70 प्रतिशत राशि सीधे गांवों के विकास पर होगी खर्च

मप्र में खनन प्रभावितों के लिए बड़ा फैसला

मप्र सरकार ने जिला खनिज प्रतिष्ठान (डीएमएफ) फंड के उपयोग में बड़ा बदलाव करते हुए खनन प्रभावित क्षेत्रों को केंद्र में रखने का फैसला किया है। अब डीएमएफ की कम से कम 70 फीसदी राशि सीधे उन गांवों, कस्बों और शहरों के विकास पर खर्च होगी जो खदानों के कारण प्रदूषण, विस्थापन और बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना कर रहे हैं। सरकार का दावा है कि नए नियमों से फंड के मनमाने उपयोग पर रोक लगेगी और खनन प्रभावित लोगों को वास्तविक लाभ मिलेगा।
प्रदेश में डीएमएफ के माध्यम से अब तक करीब 15 हजार करोड़ रुपये का संग्रह हो चुका है। इसके बावजूद कई खनन क्षेत्रों में पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। इसी स्थिति को देखते हुए सरकार ने नियमों में व्यापक संशोधन कर खर्च की प्राथमिकताएं तय कर दी हैं। नई अधिसूचना के अनुसार किसी भी खदान के चारों ओर 15 किलोमीटर की परिधि को प्रत्यक्ष खनन प्रभावित क्षेत्र माना जाएगा। इस दायरे में आने वाले गांवों, ग्राम पंचायतों और नगरीय क्षेत्रों को डीएमएफ फंड से विकास कार्यों में प्राथमिकता दी जाएगी। इससे सिंगरौली, शहडोल, अनूपपुर, सतना, कटनी, बैतूल और सीधी जैसे खनन प्रधान जिलों को सबसे अधिक फायदा मिलने की संभावना है।
हर जिले में बनेगी पांच साल की विकास योजना
सरकार ने डीएमएफ खर्च को योजनाबद्ध बनाने के लिए प्रत्येक जिले में पंचवर्षीय विकास योजना तैयार करना अनिवार्य कर दिया है। इसके लिए प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों, विशेषज्ञ एजेंसियों और सामाजिक संगठनों की मदद से जमीनी सर्वे कराया जाएगा। ग्राम सभाओं और स्थानीय निकायों के सुझावों को भी योजना में शामिल किया जाएगा। इसी आधार पर हर वर्ष अलग वार्षिक कार्ययोजना तैयार होगी, जिसे जिला खनिज फाउंडेशन बोर्ड की मंजूरी के बाद लागू किया जाएगा।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में होगी निगरानी
डीएमएफ फंड के उपयोग पर निगरानी के लिए राज्य स्तरीय समिति बनाई गई है, जिसकी अध्यक्षता मुख्य सचिव करेंगे। इससे परियोजनाओं की मॉनिटरिंग मजबूत होगी और फंड के दुरुपयोग पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। नई व्यवस्था में पेयजल आपूर्ति, जल शोधन संयंत्र, स्वास्थ्य सेवाएं, अस्पतालों में आधुनिक सुविधाएं, स्कूलों का उन्नयन, महिला एवं बाल कल्याण, कुपोषण उन्मूलन, बुजुर्ग एवं दिव्यांग सहायता, पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण, वृक्षारोपण, आवास, कृषि आधुनिकीकरण, सडक़, पुल, सिंचाई और सौर ऊर्जा परियोजनाओं को उच्च प्राथमिकता दी गई है।
भ्रष्टाचार रोकने ऑनलाइन भुगतान अनिवार्य
फंड के उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी भुगतान ऑनलाइन या अकाउंट-पेयी चेक से किए जाएंगे। नकद भुगतान पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। साथ ही जिन जिलों में डीएमएफ का वार्षिक संग्रह 10 करोड़ रुपये से अधिक है, वहां कुल राशि का 10 प्रतिशत हिस्सा अक्षय निधि के रूप में एफडी या सरकारी बॉन्ड में सुरक्षित रखा जाएगा, ताकि भविष्य में खनन गतिविधियां बंद होने के बाद भी प्रभावित क्षेत्रों के विकास और आजीविका संबंधी जरूरतों को पूरा किया जा सके। गौरतलब है कि गौरतलब है कि प्रदेश में कुल डीएमएफ संग्रह लगभग 15,000 करोड़ रुपये है। 15,592 परियोजनाओं पर 3,679 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। वहीं 1,490 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। अकेले सिंगरौली जिले में डीएमएफ संग्रह 8,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का हुआ है। यानी प्रदेश के कुल डीएमएफ संग्रह का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा सिंगरौली से आता है। यह फंड कोयला, चूना पत्थर, आयरन ओर और बॉक्साइट खदानों से मिलता है। खनन पट्टाधारकों से रॉयल्टी के निर्धारित अनुपात में राशि वसूली जाती है। नए नियमों से पहली बार डीएमएफ फंड को सीधे खनन प्रभावित आबादी के जीवन स्तर से जोड़ा गया है। यदि क्रियान्वयन प्रभावी रहा तो यह व्यवस्था खनन प्रभावित जिलों के विकास की तस्वीर बदल सकती है।