आंध्र प्रदेश में सरकारी उपक्रम विशाखापत्तनम स्टील प्लांट में सोमवार शाम स्टील मेल्टिंग यूनिट में धमाका हुआ, पिघला हुआ स्टील नीचे फ़र्श पर काम कर रहे श्रमिकों पर गिर गया, जिसमें आठ लोगों की जान चली गई और छह अन्य गंभीर रूप से झुलस गए. प्रारंभिक जांच के अनुसार, जानलेवा धमाका पिघले हुए स्टील में फंसी गैसों की वजह से हुआ.

नई दिल्ली: आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में स्थित ‘विशाखापत्तनम स्टील प्लांट’, जो एक नवरत्न केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम है और जिसकी कॉर्पोरेट इकाई राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (आरआईएनएल) केंद्रीय इस्पात मंत्रालय के अधीन कार्य करती है, के स्टील मेल्टिंग यूनिट में सोमवार शाम एक लैडल (पिघले हुए धातु को 1,500 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान पर रखने वाला पात्र) में हुए विस्फोट में आठ श्रमिकों की मौत हो गई तथा छह अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए.
विशाखापत्तनम के मुख्य कारखाना निरीक्षक (चीफ इंस्पेक्टर ऑफ फैक्ट्रीज़) की प्रारंभिक जांच के अनुसार, जानलेवा धमाका पिघले हुए स्टील में फंसी गैसों की वजह से हुआ.
उनकी रिपोर्ट में कहा गया है कि धमाका तब हुआ जब ढलाई (कास्टिंग) के लिए स्टील से भरे लैडल को घुमाया और सेंटर किया जा रहा था.
रिपोर्ट में कहा, ‘अचानक एक धमाका हुआ, जिससे लैडल पलट गया और पिघला हुआ स्टील नीचे फ़र्श पर काम कर रहे श्रमिकों पर गिर गया. धमाका शाम करीब 4.15 बजे स्लाइड गेट खोलने से पहले हुआ. बड़े औद्योगिक लैडल में पिघले हुए स्टील का तापमान करीब 1,500 से 1,600 डिग्री सेल्सियस था.’
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘धमाके के साथ ही ओवरहेड क्रेन में भी आग लग गई. धमाके से आग का एक गोला उठा और छत तक फैल गया, जैसा कि एक श्रमिक ने फैक्ट्रीज़ इंस्पेक्टर को बताया.’
इस बीच, केंद्रीय इस्पात मंत्रालय ने एक अलग बयान जारी कर कहा कि दुर्घटना एक अचानक हुए विस्फोट के कारण हुई.
मंत्रालय ने बयान में कहा, ‘घटना के समय स्टील मेल्ट शॉप-1 (SMS-1) के कास्टर-2 में कास्टिंग का काम चल रहा था. लैडल से गर्म कच्चे स्टील को आगे की कास्टिंग के लिए टंडिश में डालने के लिए स्लाइड गेट खोले जाने से पहले ही अचानक और ज़ोरदार धमाका हुआ. टंडिश एक खुला, चौड़े मुंह वाला बर्तन होता है जिसका इस्तेमाल तरल या पिघले हुए पदार्थ को बांटने के लिए फ़नल या भंडार-पात्र (रिज़र्वोयर) के तौर पर किया जाता है.’
मंत्रालय ने कहा, ‘आग का एक विशाल गोला कार्यशाला की छत तक उठ गया और उसके बाद ओवरहेड क्रेन-2 में आग लग गई.’
मंत्रालय ने यह भी कहा कि वह स्थिति पर लगातार निगरानी रख रहा है और प्रभावित परिवारों तथा घायल श्रमिकों को हर आवश्यक सहायता उपलब्ध करा रहा है. दुर्घटना की जांच के लिए बोकारो स्टील प्लांट के प्रभारी निदेशक की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय बाहरी जांच समिति गठित की गई है.
पुलिस ने मृतकों की पहचान स्लाइड ऑपरेटर जीवी अप्पाराव, प्रभाकर, भीम कुमार उर्फ गोल्ड कुमार (जो स्टील सिटी में प्रबंधक थे), कृष्णा नाग, गोल्ड कुमार, त्रिनाथ, अप्पाला राजू और रमणा के रूप में की है. अधिकारियों ने बताया कि इनमें से पांच संयंत्र के नियमित कर्मचारी थे और तीन ठेका श्रमिक थे.
वहीं, घायल कर्मचारियों की पहचान – आर. मल्लिकार्जुन राव, पी. श्रीनिवास राव, ए. अप्पाराव, सत्यनारायण, जी. सूरीबाबू और पेद्दिराजू के तौर पर हुई है.
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, लगभग 150 टन तरल स्टील 1,540 डिग्री सेल्सियस तापमान पर हुए विस्फोट के बाद हवा में उछल गया. खौलता हुआ तरल इस्पात लावे की तरह श्रमिकों पर गिरा, जिससे आठ मजदूर जलकर राख हो गए, जबकि छह अन्य गंभीर रूप से झुलस गए.
उन्होंने बताया कि कास्टिंग प्रक्रिया में तरल इस्पात को ब्लास्ट फर्नेस से कन्वर्टर तक टर्बो लैडल के माध्यम से ले जाया जाता है. विभिन्न घटकों को मिलाने के बाद उसी लैडल द्वारा तरल इस्पात को कास्टिंग मशीन तक पहुंचाया जाता है. एसएमएस-1 में कुल छह कास्टिंग मशीनें थीं. पिघले हुए स्टील को ‘ब्लूम्स’ में बदला जाता है, जो बड़े और अर्ध-निर्मित ढले हुए स्टील उत्पाद होते हैं. इनका इस्तेमाल रोलिंग मिलों में भारी औद्योगिक पुर्जे बनाने के लिए कच्चे माल के तौर पर किया जाता है. कास्टिंग विभाग में पिघले हुए स्टील की लगातार कास्टिंग से ब्लूम्स बनाए जाते हैं.
इस संदर्भ में उन्होंने बताया कि शाम करीब 4:15 बजे लैडल-19 को कन्वर्टर से निकलकर कास्टिंग मशीन-2 में पिघला हुआ स्टील डालने की इजाज़त दी गई थी. इस प्रक्रिया के दौरान लैडल में अचानक धमाका हुआ और 1,540 डिग्री सेल्सियस तापमान पर जल रहा तरल पदार्थ लावा की तरह ऊपर उछल गया. इससे उस यूनिट में भीषण आग लग गई जहां चौदह मजदूर काम कर रहे थे.
उन्होंने आगे बताया कि धमाके के बाद पिघला हुआ स्टील 70 से 80 फीट दूर तक फैल गया. उन्होंने कहा कि पिघले हुए स्टील से निकलने वाली गैसें – कार्बन, सिलिकॉन, मैंगनीज और फास्फोरस के वाष्पीकरण का नतीजा थीं, जो तब हुआ जब 16 से 18 मिनट तक कन्वर्टर में ऑक्सीजन पंप की गई थी. एल्युमीनियम और फेरो अलॉय के साथ ऑक्सीजन को डीगैस किया गया था.
केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) द्वारा तैनात चार दमकल वाहनों ने लगभग चार घंटे तक आग से संघर्ष करना पड़ा.
मृतकों के परिजनों और ट्रेड यूनियनों ने तब तक शवों को पोस्टमार्टम के लिए ले जाने का विरोध किया, जब तक प्रबंधन ने मुआवजे की घोषणा नहीं कर दी. उन्होंने शवों को ले जा रही एम्बुलेंसों को भी रोक दिया. घायलों को एयर एम्बुलेंस के माध्यम से अस्पतालों में पहुंचाया गया.
प्रबंधन ने मृतकों के परिवारों के एक सदस्य को नौकरी और रिटायरमेंट के लाभों के अलावा 25 लाख रुपये का मुआवज़ा देने की घोषणा की. साथ ही परिवारों यह अनुमति भी दी गई कि स्टील सिटी में उन्हें दिए गए क्वार्टर में पीड़ितों की रिटायरमेंट की तारीख तक रह सकते हैं.
विशाखापत्तनम के किंग जॉर्ज अस्पताल की सुपरिटेंडेंट डॉ. वाणी ने मंगलवार को बताया कि मॉर्चरी में आठ शव ऐसी हालत में मिले जिनकी पहचान नहीं की जा सकती थी. पहचान के लिए पीड़ितों के डीएनए सैंपल लिए गए. अब तक सिर्फ़ अप्पाराव, रमना और अप्पाला राजू के शवों की ही पहचान हो पाई है.
केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी लगभग आधी रात को घटनास्थल पर पहुंचे. उन्होंने मौके पर मौजूद श्रमिकों से घटना के बारे में जानकारी ली.
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने मुख्य सचिव जी. साई प्रसाद और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ स्थिति की समीक्षा की. मंत्री नारा लोकेश, वी. अनिता, संध्या रानी और केंद्रीय इस्पात राज्य मंत्री भूपतिराजू श्रीनिवास वर्मा ने आज सुबह केजीएच अस्पताल का दौरा किया.
नारा लोकेश ने मीडिया से कहा कि घटना की जांच के लिए गठित समिति अपनी रिपोर्ट सौंपने के बाद जिन अधिकारियों की ड्यूटी में लापरवाही पाई जाएगी, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.