‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े, कांग्रेस सहयोगियों के संदेश और कॉकरोच जनता पार्टी पर चर्चा

सोमवार को हुई ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई. द वायर को जानकारी मिली है कि इस बैठक में डीएमके के गठबंधन से बाहर जाने और उन्हें वापस लाने की कोशिशों पर चर्चा हुई. साथ ही गठबंधन ने एसआईआर के ख़िलाफ़ भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखने, आर्थिक संकट पर सर्वदलीय बैठक बुलाने और हर दो महीने में बैठक करने का भी फैसला किया है.

नई दिल्ली: ‘इंडिया’ गठबंधन की सोमवार (8 जून) को हुई बैठक में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) जैसे ऑनलाइन आंदोलन के तेज़ी से आगे बढ़ने जैसे मुद्दों को लेकर चर्चा हुई.

इसके अलावा द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (डीएमके) के साथ गठबंधन खत्म करने को लेकर कांग्रेस से सवाल भी किए गए. साथ ही केरल में चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस के राष्ट्रीय नेताओं द्वारा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के खिलाफ बयानबाज़ी करने और लोगों की नाराज़गी को ज़मीनी आंदोलनों में तब्दील पर ज़ोर दिया गया.

उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल में विधानसभा चुनावों के महीनेभर बाद और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के अंदर चल रही उथल-पुथल के बीच हुई इस बैठक में 25 विपक्षी दलों के नेताओं ने एकजुटता बनाने और आगे की राह तय करने के लिए हिस्सा लिया.

बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पत्रकारों को बताया कि सभी पार्टियां की पांच-सूत्रीय प्रस्ताव पर सर्वसम्मति बनी हैं. इसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश को मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और चुनावों की निष्पक्षता के बारे में पत्र भेजना; नीट-यूजी और सीबीएसई परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करना; मौजूदा आर्थिक स्थिति पर सर्वदलीय बैठक करना; और हर दो महीने में बैठक करने के साथ-साथ आगामी मॉनसून सत्र के दौरान संसदीय समन्वय बनाए रखना शामिल है.

द वायर को बैठक में मौजूद विपक्षी नेताओं से पता चला है कि इसमें सभी मौजूदा मुद्दों, आलोचनाओं, शिकायतों और सुझावों पर चर्चा की गई. नीट-यूजी और सीबीएसई परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों और बीते शनिवार को दिल्ली में सीजेपी के विरोध प्रदर्शन (जिसमें प्रधान के इस्तीफे की मांग की गई थी) के बाद शिक्षा के मौजूदा संकट पर भी बात हुई.

सूत्रों के मुताबिक, शिवसेना (यूबीटी) के उद्धव ठाकरे का मानना ​​था कि सीजेपी के विरोध प्रदर्शन में लोगों की उपस्थिति यह दिखाती है कि आम जनता को विपक्ष पर भरोसा नहीं है और इस बात पर आत्म-मंथन किया जाना चाहिए. हालांकि, नेताओं के बीच आम सहमति यह थी कि भाजपा के खिलाफ किसी भी तरह के विरोध का स्वागत है.

बताया जा रहा है कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) नेता जॉन ब्रिटास ने कहा है कि सीजेपी लोगों के गुस्से और असंतोष का नतीजा है और भारत अभी एक ‘विचित्र’ स्थिति का सामना कर रहा है, जिसमें ‘ज़मीनी और चुनावी हकीकत’ के बीच तालमेल नहीं है. एक तरफ़ जहां भाजपा चुनाव में सीटें जीत रही है, वहीं ज़मीनी स्तर पर लोगों में गुस्सा और निराशा है.

विपक्षी नेता सिविल सोसाइटी के साथ आम सहमति बनाने और आने वाले दिनों में ज़मीनी आंदोलनों के ज़रिए ‘इंडिया’ गठबंधन को एकजुट करने पर सहमत हुए.

सोमवार की बैठक में कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी और पार्टी के महासचिव केसी वेणुगोपाल और जयराम रमेश भी मौजूद थे.

वहीं, टीएमसी की ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी, कल्याण बनर्जी, डेरेक ओ’ब्रायन, राजद के तेजस्वी यादव और संजय यादव, एनसीपी (एसपी) से सुले भी इस इस बैठक में शामिल हुए, जबकि शिवसेना यूबीटी के उद्धव ठाकरे ऑनलाइन शामिल हुए.

इसके अलावा, माकपा के जॉन ब्रिटास, भाकपा के डी राजा, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, नेशनल कांफ्रेंस के उमर अब्दुल्ला और भाकपा माले के दीपांकर भट्टाचार्य भी मौजूद रहे.

झारखंड मुक्ति मोर्चा प्रमुख और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बैठक में ऑनलाइन शामिल हुए. वाइको (डीएमके), थिरुमावलवन (वीसीके), एनके प्रेमचंद्रन (आरएसपी), फ्रांसिस जॉर्ज (केरल कांग्रेस), जी. देवराजन (ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक), महबूबा मुफ्ती (पीडीपी), राजकुमार रोत (बीएपी), जयंत पाटिल (पीजेंट्स एंड वर्कर्स पार्टी ऑफ इंडिया), सुनील सिंह (लोक दल) और निर्दलीय सांसद कपिल सिब्बल भी मौजूद थे.

हालांकि, डीएमके इस बैठक में शामिल नहीं हुई, लेकिन ‘द वायर’ को पता चला है कि विपक्षी नेताओं ने कांग्रेस की इस बात के लिए अप्रत्यक्ष रूप से आलोचना की कि तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के बाद उसने डीएमके का साथ छोड़कर टीवीके के साथ गठबंधन का फैसला किया.

वहीं, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, एनसीपी (एसपी) की सुप्रिया सुले और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के तेजस्वी यादव जैसे नेताओं ने कहा कि कांग्रेस ने डीएमके के साथ सही व्यवहार नहीं किया. नेताओं के बीच इस बात पर सहमति बनी कि सभी पार्टियां डीएमके और आम आदमी पार्टी (आप) दोनों को गठबंधन में वापस लाने की कोशिश करेंगी.
वामपंथी पार्टियों ने केरल में चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस के राष्ट्रीय नेताओं राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के खिलाफ दिए गए बयानों को लेकर कांग्रेस की आलोचना की.

बैठक में माकपा के ब्रिटास ने कहा कि अगर केरल कांग्रेस के नेताओं ने उन पर हमला किया होता तो पार्टी को कोई दिक्कत नहीं होती, क्योंकि राज्य में राजनीति ऐसी ही होती है. लेकिन खरगे और राहुल गांधी विपक्ष के नेता हैं, इसलिए उनके बयानों पर आपत्ति जताई गई; उन्होंने आरोप लगाया था कि माकपा की भाजपा के साथ अंदरूनी मिलीभगत है.

बैठक में यह भी कहा गया कि भाजपा के खिलाफ लड़ने के अपने संकल्प को लेकर वामपंथियों को किसी पार्टी से किसी सर्टिफिकेट की ज़रूरत नहीं है. खबर है कि भाकपा के डी.राजा ने भी राहुल गांधी के इस बयान पर आपत्ति जताई कि ‘वामपंथी अब वामपंथी नहीं रहे.’

सूत्रों के मुताबिक, अखिलेश यादव ने भी कहा कि सहयोगियों के साथ व्यवहार करते समय कांग्रेस को ‘बड़ा दिल’ रखना चाहिए, जबकि राजद के तेजस्वी यादव ने विधानसभा चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन का मुद्दा भी उठाया.

वहीं, सहयोगियों की आलोचना का जवाब देते हुए राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस ‘इंडिया’ गठबंधन को एकजुट करने के लिए कड़ी मेहनत करेगी.

सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने केरल में चुनावों के दौरान दिए गए बयानों के संदर्भ को भी स्पष्ट किया. गांधी ने भाजपा के खिलाफ ‘प्रतिरोध’ खड़ा करने के बारे में भी बात की.

यह बैठक ऐसे दिन हुई जब टीएमसी के राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने सदन और पार्टी से इस्तीफा दे दिया.

द वायर को यह भी पता चला है कि कम से कम दस सांसदों ने नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से उनके आवास पर मुलाकात की. यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम बंगाल में नवनिर्वाचित विधायकों के एक गुट, जिसका नेतृत्व रिताब्रता बनर्जी कर रहे हैं, ने टीएमसी की विधायी पहचान का दावा किया है.

बैठक में ‘इंडिया’ गठबंधन के नेताओं ने इस बात पर भी चर्चा की कि कैसे भाजपा पार्टियों को खत्म कर रही है और नेताओं को डरा-धमकाकर या नए मौकों का लालच देकर तोड़ा जा रहा है.

बैठक के दौरान विपक्ष के नेताओं ने यह भी तय किया कि एसआईआर के मामले में सीजेआई को एक पत्र तो भेजा ही जाएगा, साथ ही वोटर लिस्ट में बदलाव के असर पर भी ध्यान देना ज़रूरी है.

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के दीपांकर भट्टाचार्य समेत विपक्ष के नेताओं ने इस बात को उठाया कि एसआईआर की वजह से न सिर्फ़ वोटरों के नाम लिस्ट से हटाए जा रहे हैं, बल्कि लोगों को दूसरे अधिकार भी गंवाने पड़ रहे हैं, जिनमें कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी शामिल है.

इसके अलावा गठबंधन के लिए एक ढांचा तैयार करने पर भी चर्चा हुई, जिसमें एक संयोजक और प्रवक्ताओं का पैनल बनाना शामिल है.

गठबंधन की अगली बैठक अगस्त में हैदराबाद में होनी है, लेकिन अभी तक इसके लिए कोई तारीख तय नहीं की गई है.

मालूम हो कि यह 2023 के बाद ‘इंडिया’ गठबंधन की पहली बड़ी बैठक थी, हालांकि पिछले साल अगस्त में राहुल गांधी के घर पर डिनर का आयोजन किया गया था.