अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि में कथित गड़बड़ियों का विवाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंच गया है. भाजपा-आरएसएस से जुड़े एक व्यक्ति ने मांग की है कि पीएम मोदी को मंदिर ट्रस्ट का प्रमुख बनाया जाए और सीबीआई, ईडी या कैग से इस मामले की जांच कराई जाए. कई अन्य लोग भी इस विचार का समर्थन कर रहे हैं.

नई दिल्ली: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि में वित्तीय गड़बड़ी के आरोपों के बीच भगवा खेमे में बेचैनी बढ़ गई है. मंदिर का प्रबंधन करने वाले ट्रस्ट ने जिस अस्पष्ट तरीके से इस मामले को संभाला है, उससे अटकलों और संशय को और बढ़ावा मिला है.
इस मामले में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से जुड़े कम से कम दो लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दखल देने की मांग की है, जबकि मंदिर से जुड़े एक प्रमुख हिंदू संत ने उन ट्रस्ट सदस्यों की ईमानदारी पर भी सवाल उठाए हैं जो कथित तौर पर इन आरोपों की जांच कर रहे हैं.
उल्लेखनीय है कि सात जून को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा सोशल मीडिया मंच एक्स पर इस संबंध में आरोप लगाए जाने के बाद इस विवाद ने तूल पकड़ लिया. इसके जवाब में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अपने महासचिव चंपत राय के ज़रिए सिर्फ़ एक स्पष्टीकरण जारी किया है.
विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ नेता राय ने कहा कि ट्रस्ट अपने कामों का समय-समय पर आंतरिक ऑडिट करवाता है और अभी भी ऐसी ही प्रक्रिया चल रही है.
उन्होंने आगे कहा कि अब तक ‘कोई खास बात’ सामने नहीं आई है. हालांकि, चंपत राय की इस सफाई से विपक्ष और भाजपा दोनों के ही सदस्य संतुष्ट नज़र नहीं आए.
उधर, अयोध्या में दंत चिकित्सक और भाजपा नेता रजनीश सिंह ने मोदी को पत्र लिखकर मांग की है कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) या प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जैसी किसी स्वतंत्र और उच्च-स्तरीय एजेंसी से जांच कराई जाए.
सिंह ने ट्रस्ट के बैंक खाते में दान इकट्ठा करने, गिनती करने, लाने-ले जाने और जमा करने की पूरी प्रक्रिया के विशेष ऑडिट की भी मांग की.
सिंह ने द वायर से कहा, ‘ट्रस्ट की चुप्पी से शक पैदा हो रहा है कि ज़रूर कोई गड़बड़ी हुई है. इसकी जांच होनी चाहिए.’
सिंह ने कहा कि शुरू में उन्हें आरोपों के बारे में पक्का पता नहीं था, लेकिन ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी कमल नयन दास के सार्वजनिक बयान के बाद उनका शक और पक्का हो गया.
बता दें कि बुधवार (10 जून) को कमल नयन दास ने स्थानीय मीडिया से कहा था कि वह इस मामले की जांच के पक्ष में हैं और उन्होंने जांच कर रहे ट्रस्ट के सदस्यों पर सवाल उठाए थे.
कमल नयन दास ने कहा था, ‘जब जांच करने वाले लोग ही बेईमान हों, तो कैसी जांच हो सकती है? वे सभी बेईमान हैं. क्या इतना हंगामा करने वाले लोग दूध के धुले हैं? जांच कौन करेगा? सिर्फ़ भगवान ही जांच करेंगे.’
हालांकि, गुरुवार को समाचार एजेंसियों- पीटीआई और आईएएनएस से बात करते हुए कमल नयन दास ने अपना रुख़ थोड़ा नरम किया, लेकिन इस बात पर ज़ोर दिया कि सही तरीके से ‘उचित कार्रवाई’ होनी चाहिए.
उन्होंंने बिना किसी का नाम लिए आरोप लगाया कि कुछ लोग, जो पहले सिर्फ़ रिक्शा या साइकिल से घूम पाते थे, अब बड़ी कारों और बड़े घरों के मालिक हैं.
सिंह का कहना है कि कमल नयन दास के बयान से उन्हें कोई शक नहीं रह गया है कि इस मामले की ठीक से जांच होनी चाहिए.
प्रधानमंत्री मोदी को लिखे अपने पत्र में सिंह ने यह भी मांग की है कि जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए ताकि राम के भक्तों का भरोसा और विश्वास फिर से बहाल हो सके.
वहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकील और भाजपा सदस्य मुरलीधर सिंह ने भी मोदी को पत्र लिखकर दान के कथित दुरुपयोग और गबन की जांच किसी उच्च-स्तरीय केंद्रीय एजेंसी से निष्पक्ष रूप से कराने की मांग की है.
मुरलीधर सिंह ने भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) से इसका ऑडिट कराए जाने की मांग की है.
ज्ञात हो कि मुरलीधर सिंह 1982 से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे हैं और राम मंदिर आंदोलन का भी हिस्सा थे. उन्होंने यह भी बताया कि राम मंदिर के निर्माण के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से मीडिया मैनेजमेंट की ज़िम्मेदारी उन्हीं के पास थी.
द वायर से बात करते हुए उन्होंने मांग की कि गुजरात के सोमनाथ मंदिर की तर्ज़ पर नरेंद्र मोदी को राम मंदिर ट्रस्ट का प्रमुख बनाया जाए.
उल्लेखनीय है कि 2021 में मोदी को सर्वसम्मति से सोमनाथ मंदिर का प्रबंधन करने वाले ट्रस्ट का अध्यक्ष चुना गया था; इस पद को संभालने वाले वे दूसरे प्रधानमंत्री बने थे.
दान की राशि में गड़बड़ी को लेकर उत्तर प्रदेश के एटा में एक कार्यक्रम के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने चंपत राय पर सवाल उठाए.
अक्सर भाजपा सरकार की आलोचना करने वाले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने आरोप लगाया कि दान का गायब हुआ पैसा मंदिर में हुई हेराफेरी की लंबी लिस्ट में बस एक और मामला है, जो मंदिर की नींव रखे जाने के समय से ही चल रही है.
जब उनसे पूछा गया कि जांच किसे करनी चाहिए, तो उन्होंने राय पर व्यक्तिगत टिप्पणी की.
अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, ‘…यह ताज़ा चोरी – यह सब तो वहां हमेशा से ही होता आ रहा है. आख़िरकार, चंपत राय ही तो वहां ज़िम्मेदार हैं. क्या आप ‘चंपत’ का मतलब जानते हैं? यह शब्द ‘चंप’ धातु से बना है; संस्कृत में ‘चंप’ का मतलब ही होता है किसी चीज़ को लेकर भाग जाना. ‘चंपत हो जाना’ का मतलब है किसी चीज़ के साथ भाग जाना. दूसरे शब्दों में, जब चंपत राय नाम के व्यक्ति को ही वहां बिठाया गया है, तो आपको अच्छी तरह समझ लेना चाहिए कि क्या होने वाला है.’
हालांकि, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपनी बातों के समर्थन में कोई जानकारी या सबूत नहीं दिया. वहीं चंपत राय की ओर से भी अविमुक्तेश्वरानंद की टिप्पणियों पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
दरअसल, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने सात जून को एक्स पर आरोप लगाया कि राम मंदिर में चढ़ावे के तौर पर आए ‘करोड़ों रुपये’ गायब पाए गए हैं और उन्होंने मांग की कि अदालतें इस मामले का स्वतः संज्ञान लें.
वहीं, चंपत राय ने माना कि ट्रस्ट के ट्रस्टियों और कर्मचारियों तथा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के कर्मचारियों द्वारा संयुक्त रूप से हुंडी गिनती कक्ष का आंतरिक ऑडिट किया जा रहा था, लेकिन इसके बाद से कोई और जानकारी सामने नहीं आई है.
मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन और सेवानिवृत्त नौकरशाह नृपेंद्र मिश्रा ने इन आरोपों के बाद दिल्ली से अयोध्या का अचानक दौरा करके इन अटकलों को और हवा दे दी.
बुधवार को दैनिक जागरण ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि पीएम के पूर्व मुख्य सचिव मिश्रा का अचानक अयोध्या दौरा इस संभावना से जुड़ा हो सकता है कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस मामले में आरोपों और आंतरिक जांच के बारे में रिपोर्ट मांगी हो. हालांकि, मिश्रा ने कहा कि उनका दौरा निर्माण कार्य से जुड़ा था.
अखबार ने बताया कि मिश्रा ने सोमवार शाम को ट्रस्ट के चार सदस्यों के साथ बैठक की. इसके अलावा 13 जून को अयोध्या में मंदिर निर्माण समिति की एक अहम बैठक होने की उम्मीद है.
मुरलीधर सिंह ने कहा कि भगवान राम को चढ़ाए गए प्रसाद के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं की रिपोर्ट, जिसमें मंदिर के कर्मचारियों की संलिप्तता भी शामिल है, करोड़ों भक्तों की आस्था को ठेस पहुंचाती है.
रजनीश सिंह ने भी कहा कि अगर ये आरोप सच हैं, तो ये कोई मामूली आर्थिक अपराध नहीं हैं.
उन्होंने प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में कहा है, ‘श्री राम मंदिर करोड़ों हिंदुओं की आस्था, भक्ति और विश्वास का केंद्र है. देश-विदेश से भक्त अपनी आस्था के अनुसार दान देते हैं. अगर दान के गलत इस्तेमाल, गबन या वित्तीय गड़बड़ी जैसी बातें सच साबित होती हैं, तो यह न सिर्फ़ एक आर्थिक अपराध है, बल्कि राम के करोड़ों भक्तों की धार्मिक भावनाओं को भी गहरी चोट पहुंचाता है.’