पति-पत्नी को साथ रहने के लिए चाहिए विवाह प्रमाण पत्र

मंगल भारत/भोपाल। मध्यप्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग की तबादला प्रक्रिया एक बार फिर विवादों में है। ई-अटेंडेंस, जनगणना ड्यूटी और न्यूनतम सेवा अवधि जैसी शर्तों से पहले ही हजारों शिक्षक तबादले की दौड़ से बाहर हो चुके थे, लेकिन अब विभाग ने पति-पत्नी को एक साथ रहने की चाह रखने वाले शिक्षकों के सामने नई बाधा खड़ी कर दी है। यदि कोई शिक्षक अपने पति या पत्नी के पदस्थ जिले में तबादला चाहता है तो पोर्टल पर उससे मैरिज सर्टिफिकेट (विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र) अपलोड करने को कहा जा रहा है। बिना प्रमाण पत्र आवेदन सब्मिट ही नहीं हो पा रहा।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि तबादला नीति में कहीं भी मैरिज सर्टिफिकेट को अनिवार्य नहीं बताया गया है, फिर भी पोर्टल पर इसे अनिवार्य कर दिया गया है। आवेदन की अंतिम तारीख सिर पर होने के कारण शिक्षक न तो प्रमाण पत्र बनवा पा रहे हैं और न ही आवेदन पूरा कर पा रहे हैं। तबादला नीति में स्पष्ट उल्लेख है कि यदि पति या पत्नी दूसरे जिले में कार्यरत हैं तो शिक्षक को पारिवारिक कारण बताते हुए उसका विवरण देना होगा। लेकिन जब शिक्षक ऑनलाइन आवेदन भर रहे हैं तो पोर्टल विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र अपलोड करने की मांग कर रहा है।
अधिकांश विवाह बिना पंजीयन के
शिक्षकों का तर्क है कि देश में आज भी बड़ी संख्या में विवाह पारंपरिक रीति-रिवाजों से होते हैं। ऐसे मामलों में विवाह का सरकारी पंजीयन नहीं कराया जाता। आमतौर पर केवल कोर्ट मैरिज, आर्य समाज विवाह या विदेश यात्रा जैसी विशेष परिस्थितियों में लोग विवाह पंजीयन कराते हैं। अब तक सरकारी विभागों में पति-पत्नी के आधार पर तबादले के लिए पति या पत्नी का पदस्थापना आदेश, ट्रांसफर आदेश या सेवा विवरण पर्याप्त माना जाता रहा है। शिक्षा विभाग द्वारा पहली बार मैरिज सर्टिफिकेट की अनिवार्यता ने शिक्षकों को चौंका दिया है। शासकीय शिक्षक संगठन, राज्य शिक्षक संघ और अन्य संगठनों ने विभाग की मंशा पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पहले ही कई शर्तों के कारण बड़ी संख्या में शिक्षक तबादला प्रक्रिया से बाहर हो चुके हैं।
नि:शक्त शिक्षकों पर भी नई मार
मामला केवल मैरिज सर्टिफिकेट तक सीमित नहीं है। नि:शक्त शिक्षकों को भी विभागीय पोर्टल ने नई मुश्किल में डाल दिया है। पोर्टल पर एक वर्ष के भीतर जारी प्रमाण पत्र ही मान्य किया जा रहा है, जबकि मेडिकल बोर्ड और नि:शक्तजन कल्याण विभाग आमतौर पर तीन वर्ष की वैधता वाला प्रमाण पत्र जारी करते हैं। जिन शिक्षकों ने दो वर्ष पहले ही अपना प्रमाण पत्र नवीनीकृत कराया था, वे अब पात्र होने के बावजूद आवेदन से वंचित हो रहे हैं।
आवेदन की अंतिम तारीख बढ़ाने की मांग
सबसे बड़ी परेशानी यह है कि आज आवेदन की अंतिम तारीख है। पहले विभाग ने 19 से 23 जून तक का समय दिया था। पहले दिन पोर्टल ही अधिकांश जिलों में नहीं खुल सका तो विभाग ने आवेदन की तिथि 20 से 24 जून कर दी। मगर इसके बाद भी सर्वर डाउन होने के कारण शिक्षक दिन भर मशक्कत करने के बाद भी आवेदन नहीं कर सके हैं। ऐसे में अब विभाग के बेढंगे बंधनों ने शिक्षकों को तबादले से दूर कर दिया है। इनके चलते शिक्षक संगठन विभाग की मंशा पर ही सवाल उठा रहे हैं। शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने मांग की है कि पोर्टल की तकनीकी खामियां तुरंत दूर की जाएं। साथ ही आवेदन की अंतिम तारीख बढ़ाई जाए, ताकि सभी पात्र शिक्षकों को आवेदन का अवसर मिल सके। संगठन का कहना है कि समस्याएं समय पर नहीं सुलझीं तो बड़ी संख्या में शिक्षक तबादला प्रक्रिया से बाहर रह जाएंगे।