यह पत्र उस घटनाक्रम के कुछ सप्ताह बाद आया है, जब 8 जून को ‘इंडिया’ गठबंधन की 25 विपक्षी पार्टियों की बैठक हुई थी. उस बैठक में दलों ने एकजुटता बनाए रखने का संकल्प लेते हुए एसआईआर तथा चुनावों की निष्पक्षता के मुद्दे पर मुख्य न्यायाधीश को संयुक्त पत्र भेजने का निर्णय लिया था. हालांकि, इस बैठक में आम आदमी पार्टी और द्रमुक शामिल नहीं हुई थीं, पर पत्र भेजने वाले दलों में वे शामिल हैं.

नई दिल्ली: देश के 23 विपक्षी दलों – जिनमें ‘इंडिया’ गठबंधन से बाहर के दल जैसे द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक), आम आदमी पार्टी (आप) और एक निर्दलीय सांसद शामिल हैं- ने मंगलवार (30 जून) को भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) को एक संयुक्त पत्र लिखा है, जिसमें चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और चुनाव से जुड़े अन्य मुद्दों चिंता जताई गई है.
यह पत्र उस घटनाक्रम के कुछ सप्ताह बाद आया है, जब 8 जून को ‘इंडिया’ गठबंधन की 25 विपक्षी पार्टियों की बैठक हुई थी. उस बैठक में दलों ने एकजुटता बनाए रखने का संकल्प लिया था और एसआईआर तथा चुनावों की निष्पक्षता के मुद्दे पर मुख्य न्यायाधीश को संयुक्त पत्र भेजने का निर्णय लिया था.
हालांकि इस महीने की शुरुआत में हुई उस बैठक में द्रमुक और आप शामिल नहीं हुए थे, लेकिन दोनों दलों ने अब इस संयुक्त पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं. द वायर को मिली जानकारी के अनुसार, यह ‘टीमवर्क’ की वजह से संभव हो पाया.
‘इंडिया’ गठबंधन की पूर्व सहयोगी द्रमुक इस महीने की शुरुआत में हुई बैठक में शामिल नहीं हुई थी. इसकी वजह यह बताई गई कि कांग्रेस ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद द्रमुक का साथ छोड़कर तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) के साथ गठबंधन करने का फैसला किया.
द वायर ने पहले अपनी रिपोर्ट में बताया था कि उस बैठक में कांग्रेस को द्रमुक के साथ उसके व्यवहार को लेकर आलोचना का सामना करना पड़ा था. साथ ही नेताओं के बीच इस बात पर सहमति बनी थी कि सभी दल द्रमुक और आप दोनों को फिर से ‘इंडिया’ गठबंधन में वापस लाने की कोशिश करेंगे.
एक बयान में कांग्रेस सांसद और पार्टी के मीडिया प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि 8 जून की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुरूप मुख्य न्यायाधीश को संयुक्त पत्र भेजा गया है.
उन्होंने कहा, ‘8 जून 2026 को ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक में 21 राजनीतिक दलों और एक निर्दलीय सांसद ने भाग लिया था. उस बैठक में चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया और चुनावों से जुड़े अन्य मुद्दों पर माननीय भारत के मुख्य न्यायाधीश को संयुक्त पत्र भेजने का निर्णय लिया गया था.’
उन्होंने आगे कहा, ‘इसी के अनुरूप 23 राजनीतिक दलों और एक निर्दलीय सांसद के हस्ताक्षरों वाला संयुक्त पत्र माननीय भारत के मुख्य न्यायाधीश को भेज दिया गया है. विपक्षी दल एकजुटता (SURE—Solidarity), एकता और प्रतिरोध (Resistance) – के सिद्धांतों पर दृढ़ता से कायम हैं.’
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने भी सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर जयराम रमेश के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए पुष्टि की कि ‘इंडिया’ गठबंधन से बाहर की पार्टियां आप और द्रमुक भी इस पत्र पर हस्ताक्षर कर चुकी हैं.
मुख्य न्यायाधीश को यह पत्र ऐसे समय भेजा गया है, जब एसआईआर प्रक्रिया को शुरू हुए एक साल पूरा हो गया है. यह अभियान पिछले साल बिहार में शुरू किया गया था. इसके बाद इसे 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया गया. इस प्रक्रिया के दौरान पांच करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा चुके हैं.
वहीं, केवल पश्चिम बंगाल में ही लगभग 27 लाख मतदाता अप्रैल में हुए विधानसभा चुनाव में मतदान नहीं कर सके, क्योंकि उनके मामले न्यायिक अधिकरणों में लंबित अपीलों के कारण अटके हुए थे.
द वायर ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया है कि एसआईआर शुरू होने के एक साल बाद भी चुनाव आयोग यह नहीं बता पाया है कि मतदाता सूचियों में कथित तौर पर कितने अवैध प्रवासी पाए गए.
दूसरी ओर, एसआईआर के तहत जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, उन्हें विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लाभ भी नहीं दिए जा रहे हैं. जबकि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने एसआईआर को वैध ठहराते हुए अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि चुनाव आयोग केवल मतदाता सूची में नाम शामिल करने के उद्देश्य से ही नागरिकता का सत्यापन कर सकता है, उससे आगे नहीं.