छात्र आंदोलन के दबाव में इस्तीफा, फिर भी धर्मेंद्र प्रधान को ‘नायक’ बता रही भाजपा

केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा नेताओं के बयानों से यह नहीं लगा कि उन्होंने इस बात पर कोई आत्ममंथन किया कि धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्री के पद से आखिर इस्तीफा क्यों देना पड़ा.

नई दिल्ली: नरेंद्र मोदी सरकार के दौरान लगातार हुए परीक्षा प्रश्नपत्र लीक मामलों के खिलाफ युवाओं के गुस्से और देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों ने आखिरकार 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देने के लिए मजबूर कर दिया. हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरे घटनाक्रम पर चुप रहे. वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों ने अपने बयानों में इस बात का कोई ज़िक्र नहीं किया कि प्रधान ने छात्र आंदोलन के दबाव में इस्तीफा दिया है.

इसके बजाय, केंद्रीय मंत्रियों ने प्रधान की जमकर तारीफ की. उन्होंने कहा कि प्रधान ने भारत की शिक्षा व्यवस्था में बदलाव लाया, राष्ट्र निर्माण में योगदान दिया और अपने पद पर रहते हुए अटूट प्रतिबद्धता दिखाई. इन बयानों में इस बात पर कोई आत्ममंथन नहीं दिखा कि आखिर उन्हें इस्तीफा क्यों देना पड़ा और जनता उनसे इस्तीफा क्यों मांग रही थी.

20 जुलाई को सीजेपी के संसद चलो मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई और अत्यधिक बल प्रयोग पर चुप्पी साधे रहे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 25 जुलाई की रात सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इस बात का उदाहरण है कि भाजपा में पद सबसे महत्वपूर्ण नहीं है.

शाह ने कहा, ‘भाजपा के कार्यकर्ताओं के लिए पद से कहीं अधिक महत्वपूर्ण देश, हमारी युवा पीढ़ी और विद्यार्थी हैं. आज केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का अपने पद से इस्तीफा इसी को दर्शाता है.’

उन्होंने लिखा, ‘मोदी सरकार देश के युवाओं की भावनाओं का सम्मान करती है और पेपर लीक के विरुद्ध आवश्यक सुधारों के लिए कटिबद्ध है. पेपर लीक के दोषियों को कठोर दंड मिले, इसके लिए मोदी जी द्वारा लिए गए निर्णय सराहनीय हैं. मुझे पूर्ण विश्वास है कि इन कदमों से नीट परीक्षा में सफल हुए विद्यार्थियों के साथ पूरा न्याय होगा.’

इसके बाद उन्होंने शिक्षा मंत्री के रूप में प्रधान के कार्यकाल की सराहना की.

धर्मेंद्र प्रधान जी ने अपने कार्यकाल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के प्रभावी क्रियान्वयन, मातृभाषाओं में परीक्षाओं की व्यवस्था, पीएम श्री विद्यालयों के विस्तार, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने, कौशल विकास एवं उद्योग-अकादमिक समन्वय को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण सुधार किए हैं. परीक्षा प्रणाली को अधिक समावेशी और छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में भी उनके प्रयास उल्लेखनीय रहे हैं. उनका कार्यकाल भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प के प्रति उनके समर्पण का परिचायक है.

हालांकि उन्होंने हाल के वर्षों में हुए लगातार पेपर लीक मामलों या इसी साल मई में सीबीएसई की ऑनलाइन मूल्यांकन प्रणाली में आई गड़बड़ियों का कोई उल्लेख नहीं किया.

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ने ‘युवाओं और छात्रों की भावनाओं का सम्मान करते हुए’ इस्तीफा दिया है.

उन्होंने कहा, ‘यह इस्तीफा इस बात का प्रमाण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हमारी सरकार के लिए छात्रों और युवाओं का भविष्य सर्वोच्च प्राथमिकता है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘नीट परीक्षा, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में जरूरी सुधारों को लेकर छात्रों की जो भी चिंताएं हैं, उन पर हमारी सरकार पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है.’

सिंह ने भी प्रधान के कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा कि उनका कार्यकाल ‘भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दृढ़ प्रतिबद्धता’ से चिह्नित रहा.

उन्होंने कहा, ‘उनका सार्वजनिक जीवन में योगदान समावेशी, भविष्य की जरूरतों के अनुरूप और नए भारत की आकांक्षाओं के अनुरूप रहा है.’

भाजपा अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद नितिन नवीन ने कहा कि पार्टी धर्मेंद्र प्रधान के फैसले के साथ खड़ी है.

उन्होंने लिखा, ‘केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में धर्मेंद्र प्रधान ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 समेत कई महत्वपूर्ण पहलों के जरिए भारत की शिक्षा व्यवस्था में सुधार करने में अहम भूमिका निभाई है. व्यापक राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देते हुए उनका इस्तीफा सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और निस्वार्थ सेवा का सर्वोच्च उदाहरण है. पार्टी इस फैसले में उनके साथ मजबूती से खड़ी है.’

प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह, जिन्होंने आंदोलन के दौरान राहुल गांधी से प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन समाप्त करने की अपील की थी, सीजेपी के साथ बातचीत में शामिल रहे थे और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनशन भी तुड़वाया था, उन्होंने भी धर्मेंद्र प्रधान की सराहना की.

उन्होंने कहा, ‘यह उनके छात्रों और सार्वजनिक जीवन से गहरे और लंबे जुड़ाव को स्वीकार करने का अवसर है. बहुत कम नेता ऐसे रहे हैं जो युवा भारत की आकांक्षाओं और चिंताओं से इतने करीब से जुड़े रहे हों.’

उन्होंने कहा, ‘उनका कार्यकाल शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की प्रतिबद्धता, ऊर्जा और स्पष्ट उद्देश्य से प्रेरित रहा. उन्होंने शिक्षा क्षेत्र की चुनौतियों का सामना करते हुए छात्रों को हमेशा केंद्र में रखा.’

उन्होंने आगे लिखा, ‘प्रधान जी, राष्ट्र निर्माण में आपके योगदान के लिए धन्यवाद. आपके भविष्य के लिए शुभकामनाएं.’

अन्य भाजपा नेताओं ने भी की तारीफ

सिर्फ केंद्रीय मंत्रियों ही नहीं, बल्कि भाजपा के अन्य नेताओं ने भी धर्मेंद्र प्रधान के समर्थन में बयान दिए. इनमें किसी ने भी इस बात का उल्लेख नहीं किया कि लगातार पेपर लीक और शिक्षा मंत्रालय की कार्यप्रणाली को लेकर उठे सवालों के बीच बढ़ते जनदबाव के कारण उन्हें इस्तीफा देना पड़ा.

अधिकांश नेताओं ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के क्रियान्वयन और पीएम श्री स्कूलों को धर्मेंद्र प्रधान की प्रमुख उपलब्धियों के रूप में गिनाया. हालांकि इन दोनों योजनाओं को भी विपक्ष और कई राज्य सरकारों की ओर से आलोचना का सामना करना पड़ा है.

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के सफल क्रियान्वयन के लिए प्रधान की सराहना करते हुए कहा कि उनका इस्तीफा इस बात का प्रमाण है कि उन्होंने राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखा. वहीं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, भाजपा के संगठन महासचिव बी.एल. संतोष, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और अश्विनी वैष्णव ने भी कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ने ‘अपने पद से ऊपर राष्ट्रीय हित को रखा.’