जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री फारूक़ अब्दुल्ला पर बेहद क़रीब से गोली चलाने की घटना सामने आई है. आरोपी ने बीते 20 सालों से उन पर हमला करने की मंशा की बात कही है. वहीं, सीएम समेत अन्य दलों के नेताओं ने इस घटना को सुरक्षा में गंभीर चूक का मामला बताते हुए सवाल उठाए हैं.

श्रीनगर: नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला बुधवार (11 मार्च) को एक जानलेवा हमले से बाल-बाल बच गए. उनकी पार्टी ने इसे सुरक्षा में बड़ी चूक बताया है.
इस संबंध में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने एक संदिग्ध को हिरासत में लिया है, जिसकी पहचान जम्मू के पुरानी मंडी निवासी कमल सिंह जामवाल के रूप में हुई है. एक वीडियो में वह जांचकर्ताओं को बता रहा है कि वह पिछले 20 सालों से अब्दुल्ला की हत्या की योजना बना रहा था.
घटना पर जानकारी देते हुए एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि अब्दुल्ला जम्मू में एक शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के सलाहकार नासिर सोगामी के साथ मौजूद थे, तभी इस हमले को अंजाम दिया गया.
जम्मू के बाहरी इलाके ग्रेटर कैलाश क्षेत्र के रॉयल पार्क में शादी समारोह स्थल के पास लगे सीसीटीवी कैमरे के वीडियो में संदिग्ध जामवाल को अपनी जेब से हथियार निकालते और अब्दुल्ला और उनके साथियों की ओर बढ़ते हुए देखा जा सकता है, जो समारोह से निकलते हुए प्रतीत हो रहे हैं.
वीडियो में जामवाल अब्दुल्ला के सिर पर पीछे से रिवॉल्वर से वार करते हुए दिख रहे हैं, जिन्हें जल्द ही सुरक्षाकर्मियों द्वारा पकड़कर मौके पर ही काबू कर लिया गया.
वहीं, दूसरे वीडियो में जामवाल को उपमुख्यमंत्री की मौजूदगी में शादी में शामिल हुए पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा पीटते हुए दिखाया गया है.
‘कोई व्यक्ति सुरक्षा के इतने कड़े घेरे के बीच पूर्व सीएम के इतने करीब कैसे पहुंच गया?’
इस मामले पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि हमलावर ने एक गोली चलाई, जिसे उनके पिता के दल की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों ने गोली की दिशा मोड़कर हत्या के प्रयास को विफल कर दिया.
उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ‘फिलहाल सवालों से ज्यादा जवाब नहीं हैं, जिनमें यह भी शामिल है कि कोई व्यक्ति जेड+ एनएसजी द्वारा संरक्षित पूर्व मुख्यमंत्री के इतने करीब कैसे पहुंच सका.’
एक प्रत्यक्षदर्शी और नेशनल कॉन्फ्रेंस के एक कार्यकर्ता (जिनकी पहचान तुरंत नहीं हो सकी) ने कार्यक्रम स्थल के बाहर पत्रकारों को बताया कि अब्दुल्ला और अन्य लोग पार्टी के कानूनी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डीएस चौहान की बेटी की शादी में शामिल होने आए थे.
प्रत्यक्षदर्शी ने आगे कहा, ‘हम अब्दुल्ला के पीछे चल रहे थे, तभी मैंने उसे (जामवाल को) डॉक्टर साहब (अब्दुल्ला) के सिर पर रिवॉल्वर तानते देखा. सुरक्षाकर्मियों ने समय रहते उसका हाथ हटा दिया और गोली हवा में चल गई. ऊपरवाले ने उन्हें बचा लिया, वरना मौके पर कोई पुलिसकर्मी मौजूद नहीं था.’
उन्होंने दावा किया कि जामवाल एक हिंदू दक्षिणपंथी संगठन से जुड़े हुए हैं. प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार, ‘वह संघी है. वह (अब तक अज्ञात) जागरण मंच के संयोजक के रूप में काम करता है.’
हालांकि, द वायर इन दावों की तत्काल पुष्टि नहीं कर सका है.
इस घटना को लेकर पुलिस अधीक्षक (जम्मू दक्षिण) अजय शर्मा ने बताया कि आरोपी को हिरासत में ले लिया गया है और उसके पास से अब्दुल्ला पर गोली चलाने के लिए इस्तेमाल की गई .32 रिवॉल्वर भी बरामद की गई है.
शर्मा ने आगे बताया, ‘यह एक लाइसेंसी हथियार था. गंग्याल पुलिस स्टेशन में आरोपी के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया गया है. आगे की जांच जारी है.’
‘पिछले बीस सालों से फारूक अब्दुल्ला को जान से मारने की कोशिश’
हिरासत में लिए जाने के बाद जामवाल से पुलिस ने हत्या के असफल प्रयास के पीछे के मकसद के बारे में पूछताछ की. इस पूछताछ का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें जामवाल कुर्सी पर आराम से बैठे हुए दिखाई देते हैं, उन्हें अपने कृत्य का पछतावा नहीं है, साथ ही वह अपने बारे में पुलिस को जानकारी देते देखे जा सकते हैं.
इस वीडियो में जामवाल को पुलिस से यह कहते हुए सुना जा सकता है कि वे पिछले बीस सालों से फारूक अब्दुल्ला को जान से मारने की कोशिश कर रहे थे.
हमवावर ने आगे बताया, ‘उन्हें मारना मेरा निजी मिशन था. आज मुझे मौका मिला, लेकिन वह बच गए. मेरे पास निजी हथियार है जिसका इस्तेमाल मैंने गोली चलाने में किया.’
वीडियो में जामवाल, जो कथित तौर पर गोलीबारी के समय नशे की हालत में थे, जांचकर्ताओं को यह भी बताते हैं कि उन्हें उस शादी में आमंत्रित किया गया था जहां यह घटना घटी. उन्होंने जांचकर्ताओं से कहा, ‘मैं कहीं काम नहीं करता. मेरी दो-तीन दुकानें हैं जिन्हें मैंने किराए पर दे रखा है. यही मेरी आमदनी का एकमात्र जरिया है.’
इस संबंध में जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री चौधरी ने कथित सुरक्षा चूक पर चिंता जताते हुए पुलिस से स्पष्टीकरण मांगा है.
कार्यक्रम स्थल के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘जब पूर्व मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और (जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री के सलाहकार) किसी समारोह में शामिल हों और कोई व्यक्ति बंदूक लेकर अंदर घुस जाए, तो सुरक्षा व्यवस्था की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है. यह सुरक्षा में बहुत बड़ी चूक है.’
हालांकि, जम्मू-कश्मीर पुलिस की ओर से एनसी नेताओं के आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
इस हमले को लेकर सीएम के सलाहकार सोगामी ने कहा कि अब्दुल्ला सुरक्षित हैं और जांच जारी है. अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी. इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ है.
इस घटना पर जम्मू-कश्मीर कांग्रेस अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा ने भी सोशल मीडिया मंच एक्स पर सवाल उठाए.
उन्होंने लिखा, ‘आज जम्मू में पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला साहब और अन्य वरिष्ठ नेताओं पर हुई गोलीबारी की भयावह घटना की मैं कड़ी निंदा करता हूं. हिंसा की ऐसी घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं और क्षेत्र में मौजूदा सुरक्षा स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती हैं.’
कर्रा ने आगे कहा, ‘बढ़ते अपराध और अराजकता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी जिन लोगों पर है, उन्हें जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए. जनता को सुरक्षा, स्थिरता और सुरक्षित वातावरण का अधिकार है, और यह प्रशासन की जिम्मेदारी है कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों.’
कश्मीर के प्रमुख धर्मगुरु मीरवाइज उमर फारूक ने भी इस हमले की निंदा करते हुए जांच की मांग की है.