रॉ मटेरियल में 30% से 50% की बढ़ोतरी

भोपाल/मंगल भारत। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण चीन से आने वाले एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रेडिएंट्स की सप्लाई बाधित होने और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी से मध्यप्रदेश की फार्मा इंडस्ट्री में शटडाउन का खतरा मंडरा रहा है। फार्मा इंडस्ट्री में लगने वाले रॉ मटेरियल के रेट में 30 प्रतिशत से लेकर 50 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी हुई है। इन बढ़े हुए रेट में भी रॉ मटेरियल की सप्लाई नहीं हो पा रही है, जिससे फार्मा यूनिट्स में काम बंद होने की नौबत आ गई है। एमपी की 300 फार्मा यूनिट्स में अब तीन शिफ्ट की जगह सिर्फ एक ही शिफ्ट में दवाओं का प्रोडक्शन हो रहा है। नजीता यह है कि रोजमर्रा में काम आने वाली पैरासिटामोल, एजिथ्रोमाइसिन, शुगर और बीपी की दवाएं महंगी हो गई हैं।
फार्मा इंडस्ट्री में दवाओं के प्रोडक्शन में ये समस्याएं
इंडियन ड्रग्स मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन मप्र के सचिव डॉ. अनिल सबरवाल ने बताया कि ड्रग्स में रॉ मटेरियल महंगा होने के कारण प्रोडक्शन रेट बड़ाना मजबूरी हो गया है। सरकार का डीपीसीओ यानी ड्रग एंटरप्राइजेज कंट्रोल अथॉरिटी है, उसने एक प्राइज दे रखा है कि आप किसी चीज को तय रेट से ज्यादा महंगा नहीं बेच सकते हैं। अब ओवरहेड खर्चें बढ़ गए हैं। 15 रुपए में 10 गोली का प्रोडक्शन कॉस्ट ही नहीं आ रहा है। ऐसे में सरकार 20 से 25 प्रतिशत रेट बढ़ाने का रिलेक्शन देती है, जो पहले ही दे चुकी है। फार्मा इंडस्ट्री को मिडिल ईस्ट तनाव के कारण रॉ मटेरियल और पैकेजिंग सामग्री की उपलब्धता प्रभावित हो रही है। सप्लाई चेन बाधित है, लागत में वृद्धि हो रही है और इंजेक्टेबल दवाओं के निर्माण के लिए आवश्यक गैस की भी कुछ स्थानों पर कमी देखी जा रही है। फार्मा इंडस्ट्री के सबरवाल ने बताया कि पेट्रोकेमिकल का सबसे बड़ा इम्पैक्ट प्लास्टिक इंडस्ट्री के बाद किसी पर आता है तो वह फॉर्मा इंडस्ट्री है। पेट्रोकेमिकल से प्रोपलीन ग्लाइकोल, पीजी 400, पीजी 6000, पीजी 5000, एसीटोन, एमडीसी, आईसोप्रोपाइल पेट्रोकेमिकल से बनते हैं। पेट्रोकेमिकल से बने रॉ मटेरियल के प्रोडक्ट के बिना बनी दवाएं सांस भी नहीं ले सकती हैं। इन सभी का उपयोग दवाओं को साफ करने, फिनिश करने और पालिशिंग के लिए किया जाता है। इंप्योरिटीज को अलग करने के लिए इन रॉ मटेरियल की जरूरत पड़ती है। फार्मा इंडस्ट्री के एक्सपर्ट का कहना है कि आने वाले समय में एम्पुल यानी कांच की बोटल जिसमें इंजेक्शन लगाने की दवाई पैक की जाती है, उसको लेकर समस्या बढ़ेगी। इंजेक्शन बनाने वाली कंपनियों को एलपीजी गैस की सप्लाई सुचारू नहीं होने के कारण दिक्कत आ रही है। इंजेक्शन बनाने के लिए जो लॉकिंग की जाती है वह एलपीजी से ही हो पाती है।
रेट बढ़ाना दवा कंपनियों की मजबूरी
ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स के जनरल सेक्रेटरी राजीव सिंघल ने बताया कि एमपी की जो फार्मा इंडस्ट्री की दवाईयां सबसे ज्यादा मिडिल ईस्ट कंट्री में सप्लाई की जाती है। अभी रॉ मटेरियल जैसे एपीआई, साल्वेंट और एल्यूमिनियम की शॉर्टेज चल रही है। दवा कंपनियों ने इस समस्यों के बाद अपने रेट बढ़ाए हैं। जहां तक फार्मा इंडस्ट्री के शट-डॉउन की बात है तो जब तक रॉ मटेरियल, एपीआई और साल्वेंट नहीं मिलेगा तो शट-डाउन तो करना ही पड़ेगा। हालांकि अभी तक आम आदमी पर इसका असर देखने को नहीं आया है। सरकार ने वैसे 6.5 प्रतिशत से ज्यादा का प्राइस हाइक कर दिया है जिसे हर साल किया जाता है।
चीन से आने वाले रॉ मटेरियल की सप्लाई रुकी
फार्मा इंडस्ट्री में दवाओं के उत्पादन के लिए सबसे ज्यादा रॉ मटेरियल चीन से आता है। वर्तमान में चीन से आने वाले रॉ मटेरियल की सप्लाई चैन पूरी तरह से टूट गई है। पीथमपुर एसोसिएशन के कोठारी ने बताया कि चीन से आने वाले रॉ मटेरियल जैसे डाइक्लोफेनेक, एमाक्सी, एजिथ्रोमाइसिन, पैरा-एमिनोफेनोल एम्पीसिलिन, पेनिसिलिन सहित अन्य ड्रग साल्वेंट की सप्लाई पूरी तरह से रुक गई है।