रामपुर नैकिन में ‘वर्दी’ का संरक्षण! पत्थरहाई घाट पर रेत का खेल और रायखोर में गौ-तस्करी—क्या थाना प्रभारी ही हैं असली ‘खेलाड़ी’?

रामपुर नैकिन में ‘वर्दी’ का संरक्षण! पत्थरहाई घाट पर रेत का खेल और रायखोर में गौ-तस्करी—क्या थाना प्रभारी ही हैं असली ‘खेलाड़ी’?

मंगल भारत:सीधी। जिले के रामपुर नैकिन थाना क्षेत्र में कानून व्यवस्था अब पूरी तरह ‘नीलाम’ हो चुकी है। पत्थरहाई घाट (डिठौरा) से बालू का अवैध उत्खनन हो या रायखोर से होने वाली गौ-तस्करी, इन सबका तार अब सीधे थाने की चौखट से जुड़ता नजर आ रहा है। सबसे बड़ा सवालिया निशान थाना प्रभारी (TI) की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है, जिनके कार्यकाल में माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि शिकायतकर्ताओं को ही जेल भेजने की तैयारी कर ली जाती है।
सालों पुराना ‘याराना’ और ₹4500 की वसूली
सूत्र बताते हैं कि रामपुर नैकिन थाना प्रभारी और क्षेत्र के बड़े माफियाओं के बीच ‘याराना’ सालों पुराना है। आरोप है कि पत्थरहाई घाट पर रेत के अवैध कारोबार को संरक्षण देने के लिए नगरसेना के जवान और डायल 100 के ड्राइवर खुलेआम अवैध वसूली का रैकेट चला रहे हैं। रात के अंधेरे में एक ट्रैक्टर से 4500 रुपये की वसूली की जाती है। जनता पूछ रही है कि क्या यह वसूली थाना प्रभारी की जानकारी के बिना संभव है?
रायखोर बना तस्करी का अड्डा, पुलिस बनी मूकदर्शक
रेत के साथ-साथ रायखोर का रास्ता गौ-तस्करों के लिए ‘लाइफलाइन’ बन चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि जब भी गौ-तस्करी की सूचना पुलिस को दी जाती है, तो कार्रवाई के बजाय तस्करों को सुरक्षित रास्ता दे दिया जाता है। इस ‘याराने’ का नतीजा यह है कि बीते दिनों गौ-तस्करी के खिलाफ आवाज उठाने वाले गौ-रक्षकों और समाजसेवियों पर ही FIR दर्ज कर दी गई।
शिकायतकर्ताओं पर FIR: पुलिस या माफिया की निजी सेना?
रामपुर नैकिन पुलिस की कार्यशैली ने अब जनता के मन में यह डर बैठा दिया है कि थाने जाना मतलब खुद को अपराधी साबित करवाना है। सोशल मीडिया पर सच लिखने वालों और जिले के उच्च अधिकारियों (SP-IG) से गुहार लगाने वाले गौ-रक्षकों को पुलिस जिस तरह प्रताड़ित कर रही है, वह किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा करता है।
उच्च स्तरीय जांच की मांग: बेनकाब होंगे खाकी वाले चेहरे?
क्षेत्र की त्रस्त जनता अब सवाल कर रही है:
आखिर थाना प्रभारी को इन माफियाओं से इतना लगाव क्यों है?
क्या पत्थरहाई घाट और रायखोर की ‘महीना वसूली’ का बड़ा हिस्सा ऊपर तक जा रहा है?
क्यों अभी तक वसूली करने वाले डायल 100 ड्राइवर और जवानों पर निलंबन की कार्रवाई नहीं हुई?