छत्तीसगढ़: वेदांता पावर प्लांट हादसे में मरने वालों की संख्या 19 हुई, कांग्रेस ने की न्यायिक जांच की मांग

छत्तीसगढ़ के सक्ती ज़िले के सिंघीतराई में स्थित वेदांता लिमिटेड के थर्मल पावर प्लांट में मंगलवार दोपहर को हुए धमाके से मरने वालों की संख्या वालों की संख्या 19 हो गई है. कांग्रेस ने प्लांट प्रबंधन के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज करने और न्यायिक जांच की मांग करते हुए आरोप लगाया है कि लापरवाही बरती गई है और सरकार दोषियों को बचाने की कोशिश कर रही है.

नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ के सक्ती ज़िले के सिंघीतराई में स्थित वेदांता लिमिटेड के थर्मल पावर प्लांट हुए दर्दनाक हादसे में मरने वालों की संख्या 19 हो गई है.

यह धमाका मंगलवार दोपहर को एक स्टील ट्यूब में हुआ, जो बॉयलर से टर्बाइन तक हाई-प्रेशर वाली भाप ले जा रही थी.

अमर उजाला के मुताबिक, मृतकों की पहचान – रितेश कुमार राय, निवासी सोनबरसा भागलपुर बिहार, अमृत लाल पटेल, निवासी मांझापारा, टुंड्री, ठंडाराम लहरे, निवासी जमगहन मालखरौदा, तरूण कुमार ओझा, निवासी रोहराबंध धनबाद झारखण्ड, आकिब खान निवासी पैथन दरभंगा बिहार, सुसंता जना पश्चिम बंगाल, अब्दुल करीम, निवासी बोका झारखण्ड, उद्धव सिंह यादव, खरसिया, शेख सईफउद्दीन, निवासी पश्चिम बंगाल, पप्पु कुमार, उत्तर प्रदेश, अशोक पहरे निवासी पलामू झारखण्ड, मानस गिरी, निवासी पश्चिम बंगाल, बृजेश कुमार, निवासी उत्तर प्रदेश, रामेश्वर महिलाने, निवासी जांजगीर चांपा, कार्तिक महतो, पश्चिम बंगाल, नदीम अंसारी, निवासी फगुरम,शिवनाथ मुर्मू, चिंतरंजन डलोई, निवासी मेदनीपुर, दीपांकर सिंह निवासी मेदनीपुर बोरोबाई रूप में हुई है.

समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, घायल हुए 20 मज़दूरों में से पांच को बेहतर इलाज के लिए रायपुर भेज दिया गया है, जबकि 15 का इलाज रायगढ़ जिले के अस्पतालों में चल रहा है.

इस बीच, वेदांता ने परिजनों के लिए 35 लाख रुपये के मुआवज़े और रोज़गार सहायता की घोषणा की और घायलों के लिए 15 लाख रुपये देने का ऐलान किया.

वेदांता ने एक्स पर कहा, ‘दुख की घड़ी में हम प्रभावित परिवारों के साथ मजबूती से खड़े हैं. हम मृतकों के परिवारों को 35 लाख रुपये और रोजगार सहायता प्रदान करेंगे तथा घायलों को 15 लाख रुपये के साथ-साथ पूरी तरह ठीक होने तक वेतन का भुगतान जारी रखेंगे. उन्हें काउंसलिंग सहायता भी दी जाएगी.’
वहीं, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मृतकों के परिवारों के लिए 5 लाख रुपये और घायलों के लिए 50,000 रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है. उन्होंने बिलासपुर संभाग के कमिश्नर को इस घटना की जांच करने का भी आदेश दिया है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है.

जांच के आदेश, परिजनों को प्रभावित कर्मियों की खबर नहीं

रिपोर्ट के मुताबिक, जिला प्रशासन ने एक मजिस्ट्रियल जांच का आदेश दिया है, जबकि कंपनी ने अपनी आंतरिक जांच शुरू कर दी है. सक्ती के कलेक्टर अमृत विकास टोपनो ने डभरा के अनुविभागीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम) को जांच करने और 30 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने के लिए नियुक्त किया है. यह जांच इस बात का पता लगाएगी कि क्या यह दुर्घटना किसी तकनीकी या मानवीय गलती के कारण हुई थी, और प्लांट में सुरक्षा जांच की स्थिति का भी आकलन करेगी.

इस बीच, घटना के करीब 17 घंटे बीत जाने के बाद भी परिजन अपनों को ढूंढते पाए गए. गेट के बाहर जमा हुए कई लोग बेचैनी से पूछते नजर आए कि ‘क्या कोई लिस्ट है? क्या आपको उनके नाम पता हैं?’

रिपोर्ट के अनुसार, भले ही आधिकारिक आंकड़े सामने आने लगे थे, लेकिन नामों की कोई जानकारी नहीं मिल रही थी. न तो प्रशासन ने और न ही प्लांट प्रबंधन ने पीड़ितों की कोई लिस्ट जारी की थी. कई परिवार – जिनमें से ज़्यादातर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और आस-पड़ोस के इलाकों से आए प्रवासी मज़दूर थे – अस्पताल के गलियारों, प्लांट के गेटों और अस्थायी कैंपों के बीच भटकते रहे, अपने परिजनों का सुराग ढूंढते हुए.

उधर, विपक्षी दल कांग्रेस ने प्लांट प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है और न्यायिक जांच की मांग करते हुए आरोप लगाया है कि इसमें लापरवाही बरती गई है और सरकार दोषियों को बचाने की कोशिश कर रही है. उसने पीड़ितों के परिवारों के लिए अधिक मुआवज़े की भी मांग की है.

पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने भी इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हादसे के पीछे के कारणों की गहराई से जांच होनी चाहिए. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है? साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि प्लांट में बुनियादी सुविधाएं जैसे एंबुलेंस तक उपलब्ध नहीं थीं, जो श्रमिकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है.

ज्ञात हो कि सिंघीतराई में स्थित 1,200 मेगावट का यह कोयला-आधारित थर्मल पावर प्रोजेक्ट मूल रूप से 2009 में ‘एथेना छत्तीसगढ़ पावर लिमिटेड’ के तहत शुरू किया गया था, लेकिन 2016 से 2022 के बीच इसका काम रुका रहा. वेदांता ने 2022 में इस प्लांट का अधिग्रहण कर लिया, जिसके बाद पिछले साल अगस्त में इसकी 600 मेगावट की एक यूनिट चालू की गई, जबकि दूसरी यूनिट का निर्माण कार्य अभी भी चल रहा है.