हमें ट्रांसफर चाहिए… कर्मचारियों ने किया आवेदन, जनगणना ड्यूटी से मांगा छुटकारा

नई तबादला नीति लागू करने की तैयारी…
भोपाल/मंगल भारत

मध्य प्रदेश सरकार अप्रैल माह के अंत में नई तबादला नीति लागू करने की तैयारी में है। इसके लिए सामान्य प्रशासन विभाग नई ट्रांसफर पॉलिसी का ड्राफ्ट तैयार कर रहा है। इसे कैबिनेट में पेश किए जाने के बाद 15 मई से तबादलों पर लगी रोक को एक माह के लिए हटाया जा सकता है। इस साल राज्य सरकार तबादला आदेश ऑनलाइन जारी करने के साथ ही किसी भी संवर्ग में अधिकतम 20 फीसदी अफसरों या कर्मचारियों के तबादलों को मंजूरी दे सकती है। राज्य संवर्ग के प्रथम श्रेणी के ट्रांसफर मुख्यमंत्री के अनुमोदन से होंगे, जबकि शेष अधिकारियों के तबादले विभागीय मंत्रियों की मंशानुसार होंगे। इसमें एक ही स्थान पर तीन साल से ज्यादा समय से काम कर रहे अधिकारियों के तबादलों को प्राथमिकता दी जाएगी। यह पॉलिसी अगली कैबिनेट बैठक में पेश की जा सकती है।
जनगणना में लगे अधिकारी-कर्मचारियों के तबादलों पर रहेगी रोक: सामान्य प्रशासन विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस दौरान जनगणना के काम में लगे अधिकारी-कर्मचारियों के तबादले फिलहाल नहीं होंगे। इसके लिए भारत सरकार द्वारा साफ निर्देश दिए गए हैं। यह आदेश जनगणना का काम पूरा होने तक प्रभावी रहेगा। मध्य प्रदेश में 1 मई से जनगणना शुरू हो रही है और पहले चरण में मकानों की गिनती होनी है। अधिकारियों की मानें तो हर जिले में कुल उपलब्ध कर्मचारियों में से 15 से 20 प्रतिशत कर्मचारियों की जनगणना में ड्यूटी लगाई गई है। जनगणना का काम समयबद्ध (टाइम-बाउंड) है और केंद्र सरकार इसकी मॉनिटरिंग करती है। ऐसे में किसी भी लापरवाही या देरी के लिए राज्य सरकार जिम्मेदार होगी। इसलिए जनगणना में लगे कर्मचारियों के तबादलों पर रोक लगाना सरकार की मजबूरी है। हालांकि, ऐसे अधिकारी-कर्मचारियों के लिए सरकार अलग से प्रावधान करने पर विचार भी कर रही है।
जनगणना ड्यूटी ट्रांसफर की राह में बन रही बाधा
प्रदेश में तबादलों के दौरान मनचाही पोस्टिंग के लिए अधिकारी और कर्मचारी अपने स्तर पर भी जुटे हुए हैं। ऐसे में उन्हें यह जानकारी मिल गई है कि जनगणना ड्यूटी उनके ट्रांसफर की राह में बाधा बन सकती है। यही वजह है कि अब अधिकारी और कर्मचारी जनगणना की ड्यूटी से खुद को मुक्त कराने के लिए स्थानीय जिला प्रशासन को अपने आवेदन दे रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, भोपाल में अब तक 2800 और इंदौर में लगभग 1500 आवेदन आ चुके हैं। अगर पूरे प्रदेश के आंकड़ों पर नजर डालें, तो लगभग 15 हजार आवेदन जनगणना ड्यूटी से हटाने के लिए आ चुके हैं।