मीडिया रिपोर्ट के बाद कांग्रेस ने की सीएम से जुड़े ज़मीन के सौदों की न्यायिक जांच की मांग.भोपाल.

कांग्रेस ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवार के ख़िलाफ़ उज्जैन में ज़मीन से जुड़े करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट जज की निगरानी में जांच कराने की मांग की है. एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मोहन यादव के सीएम बनने के बाद उनके परिवार और उनसे जुड़ी कंपनियों ने उज्जैन में 168 एकड़ ज़मीन खरीदी है. इनमें से अधिकतर नई सड़क परियोजनाओं और भूमि उपयोग परिवर्तन वाले क्षेत्रों में हैं.

मंगल भारत/भोपाल: कांग्रेस ने मंगलवार (23 जून) को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवार व उनसे जुड़ी रियल एस्टेट कंपनियों के ख़िलाफ़ उज्जैन में ज़मीन से जुड़े करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए इस मामले की न्यायिक जांच की मांग की है.

पार्टी ने इसे ‘हितों के टकराव’ (conflict of interest) का स्पष्ट मामला बताते हुए मुख्यमंत्री से इस्तीफ़े की मांग भी की है.

उल्लेखनीय है कि मंगलवार को इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया कि दिसंबर 2023 में मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद से मोहन यादव के परिवार, रिश्तेदारों और परिवार से जुड़ी रियल एस्टेट कंपनियों ने उज्जैन और उसके आसपास कम से कम 137 भूखंड खरीदे हैं, जिनका कुल क्षेत्रफल लगभग 168 एकड़ और घोषित कीमत करीब 45 करोड़ रुपये है.

रिपोर्ट के मुताबिक, इन जमीनों का बड़ा हिस्सा उन इलाकों में स्थित है जहां राज्य सरकार ने नई सड़क परियोजनाओं, हाईवे विस्तार और भूमि उपयोग (लैंड यूज) में बदलाव की योजनाएं घोषित की हैं. इससे इन क्षेत्रों की जमीनों के मूल्य में भविष्य में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की संभावना बताई जा रही है.

पड़ताल में यह भी सामने आया है कि जमीन खरीदने वालों में मुख्यमंत्री की पत्नी सीमा यादव, पुत्रवधू शालिनी यादव, भाई नंदलाल और नारायण यादव, नारायण यादव की पत्नी रेखा, उनके बेटे अभय यादव और चचेरे भाई गोविंद व निलेश यादव शामिल हैं. इनमें से कई खरीद सीधे तौर पर की गईं, जबकि कुछ परिवार से जुड़ी चार रियल एस्टेट कंपनियों के जरिए हुईं.

विपक्ष ने साधा निशाना

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद कांग्रेस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा शासित राज्य के मुख्यमंत्री पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने कहा कि मुख्यमंत्री ने उज्जैन को ज़मीन के संदिग्ध सौदों का अड्डा बना दिया है.

हालांकि, मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने इन आरोपों को निराधार बताया है.

प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया रिपोर्ट का जिक्र करते हुए जीतू पटवारी ने कहा, ‘मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार और रिश्तेदारों के पास 245 प्लॉट में फैली 335 एकड़ ज़मीन है. इसमें से 137 प्लॉट में फैली 168 एकड़ ज़मीन उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद खरीदी गई है.’

सभी रिश्तेदारों का नाम लेते हुए पटवारी ने कहा, ‘यह ज़मीन 11 रिश्तेदारों- भतीजे, बहन, भाई, भाभी और पत्नी के नाम पर खरीदी गई है और ज़्यादातर ज़मीन उज्जैन में है. यह ज़मीन चार रियल एस्टेट कंपनियों के ज़रिए खरीदी गई थी, जिनमें मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी की बड़ी हिस्सेदारी है. परिवार के करीबी रिश्तेदारों की तीन अन्य कंपनियों में भी बड़ी हिस्सेदारी है. इन ज़मीनों के आस-पास कई सड़क परियोजनाएं गुज़री हैं.’

पटवारी ने मुख्यमंत्री से सवाल किया, ‘क्या यह सच है कि आपके मुख्यमंत्री बनने के बाद आपके परिवार और उनसे जुड़ी कंपनियों ने 137 प्लॉट खरीदकर 168 एकड़ ज़मीन हासिल की? विकास परियोजनाओं से प्रभावित इलाकों में लगभग 111 एकड़ ज़मीन खरीदी गई – क्या यह महज़ एक इत्तेफ़ाक है?’
वहीं, सिंघार ने पूछा, ‘क्या सरकार उन सभी परियोजनाओं के लिए ज़मीन के इस्तेमाल में बदलाव की सूची सार्वजनिक करेगी, जिनके इलाकों में आपके परिवार ने ज़मीन खरीदी है? क्या आप ज़मीन के इस सौदे के मामले की सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज से न्यायिक जांच कराने की घोषणा करेंगे?’

इस संबंध में कांग्रेस प्रवक्ता जयराम रमेश ने भी सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर कहा कि भाजपा की मध्य प्रदेश की ‘डबल इंजन’ की सरकार में ‘लूट का इंजन’ तेज रफ्तार से चल रहा है और खुद प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव इस लूट के कर्ताधर्ता बने हुए हैं.
इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए व्यापमं घोटाले के ह्विसिलब्लोअर डॉ. आनंद राय ने अखबार से कहा, ‘अब इस मामले में दो जांच की ज़रूरत है. पहली ज़मीन के सौदे पर और दूसरी इस बात पर कि ये पेपर लीक किसने किए.’

उल्लेखनीय है कि इस मामले को लेकर एक विचित्र बात सामने आ रही है, जिसमें भाजपा के कुछ राजनीतिक विरोधियों का कहना है कि इस पूरे विवाद का खुलासा स्वयं भाजपा के लोगों ने ही किया है क्योंकि वे मोहन यादव को सीएम पद से हटाना चाहते हैं.

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी लखनऊ में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि मोहन यादव को बदनाम करने के लिए भाजपा ने यह साज़िश की है.

अखिलेश यादव ने कहा, ‘मोहन यादव को बदनाम करने के लिए भाजपा ने यह साज़िश की है. और अगर मोहन यादव पर ये आरोप है, तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने तो 300 से 600 एकड़ ज़मीन ली है.’

उन्होंने कहा, ‘यह कोई नई बात नहीं है कि उन्होंने ज़मीन ली है. वे पहले रियल एस्टेट का काम करते थे. आप यह क्यों भूल जाते हैं? भाजपा मुख्यमंत्री बदलना चाहती है, इसलिए ये आरोप लगवा रही है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘वे मध्य प्रदेश और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों को हटाना चाहते हैं. वे इन दोनों को इसलिए हटाना चाहते हैं क्योंकि वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को हटाना चाहते हैं. यह उन्हें हटाने की एक साज़िश है.’

बचाव में भाजपा

वहीं, मध्य प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा, ‘आज कांग्रेस पार्टी द्वारा हमारे लोकप्रिय मुख्यमंत्री मोहन यादव के खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह गलत हैं. कांग्रेस और उसके नेता भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं. मेरा मानना है कि इन आरोपों में बिल्कुल भी सच्चाई नहीं है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘मैं यह बताना चाहता हूं कि जब हमारे मुख्यमंत्री ने 2023 में अपना नामांकन दाखिल किया था, तब उनके पास 17 एकड़ ज़मीन थी. इस 17 एकड़ ज़मीन में कोई बदलाव नहीं हुआ है. उनकी पत्नी सीमा यादव के नाम जो 12.29 एकड़ ज़मीन थी, वह भी 2026 तक उतनी ही रही. एक सिद्धि विनायक कंपनी का आरोपों में उल्लेख किया गया है. उसके पास 2023 में 68 एकड़ ज़मीन थी, जो जून में घटकर 65 एकड़ रह गई, और मुख्यमंत्री ने 2017 में ही उसके निदेशक पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.’

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव खुद भी इस मामले पर अपना पक्ष रखेंगे और जो भी उन्हें सही लगेगा, वह कार्रवाई करेंगे.

गौरतलब है कि मोहन यादव के पद संभालने के बाद उज्जैन में ज़मीन से जुड़ा यह कोई पहला विवाद नहीं है. इससे पहले सितंबर 2025 में भी राज्य सरकार की उस घोषणा के बाद विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए थे, जिसमें कहा गया था कि 2028 में उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ कुंभ के लिए स्थायी ढांचे (permanent structures) बनाने के लिए शिप्रा नदी के पास लगभग 1,800 एकड़ कृषि भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा.

हालांकि, जिस ज़मीन पूलिंग नीति के तहत यह अधिग्रहण किया जाना था, उसकी घोषणा शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली पिछली भाजपा सरकार ने की थी, लेकिन विरोध-प्रदर्शनों—खासकर आरएसएस से जुड़े किसान संगठन ‘भारतीय किसान संघ’ के जोरदार विरोध के बाद आखिरकार यादव को यह नीति रद्द करने के लिए मजबूर होना पड़ा.