चुरहट में प्रशासनिक व्यवस्था बेपटरी! तबादले के 11 दिन बाद भी नए अफसर नहीं, जनता बेहाल
एसडीएम, तहसीलदार और सीएमओ के पद खाली जैसे हालात, फाइलें थमीं, प्रमाण पत्र से लेकर सीमांकन तक के काम अटके
चुरहट। चुरहट में प्रशासनिक व्यवस्था इन दिनों पूरी तरह से लड़खड़ाती नजर आ रही है। 15 जून को राज्य शासन द्वारा एसडीएम, तहसीलदार और नगर परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) के तबादले के आदेश जारी किए गए थे, लेकिन 11 दिन बीत जाने के बाद भी न तो अधिकारियों को विधिवत भारमुक्त किया गया है और न ही उनकी जगह नए अधिकारियों की पदस्थापना हो सकी है। इस असमंजस का सबसे बड़ा खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
कार्यालयों में पहुंचने वाले लोगों को कर्मचारियों का एक ही जवाब सुनने को मिल रहा है—”साहब का तबादला हो गया है, नए अधिकारी आ जाएंगे तब काम होगा।” इस एक जवाब ने सैकड़ों लोगों के जरूरी कामों पर ब्रेक लगा दिया है।
राजस्व विभाग में नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा, आय, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र जैसे जरूरी प्रकरण लंबित हैं। वहीं नगर परिषद में विकास कार्यों की फाइलें धूल फांक रही हैं। दूर-दराज़ के गांवों से आने वाले लोग रोज़ कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें निराश होकर लौटना पड़ रहा है।
कुर्सियां खाली या जिम्मेदारी से बचने का खेल?
क्षेत्र में यह चर्चा तेज है कि आखिर चुरहट जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्र में अधिकारियों की नियुक्ति में इतनी देरी क्यों हो रही है। क्या शासन किसी निर्णय का इंतजार कर रहा है, या फिर अधिकारी यहां पदभार ग्रहण करने से कतरा रहे हैं? इन सवालों का जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है। प्रशासन की ओर से भी अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
जनता में बढ़ रहा आक्रोश
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते नए अधिकारियों की पदस्थापना नहीं हुई तो प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है। लोगों ने शासन और जिला प्रशासन से मांग की है कि चुरहट के रिक्त पदों पर तत्काल अधिकारियों की नियुक्ति कर लंबित कार्यों का निराकरण कराया जाए, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।
तबादले के आदेश जारी हो चुके हैं, लेकिन नए अधिकारियों की तैनाती में हो रही देरी ने चुरहट की प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी निगाहें शासन और जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।