मंगलवार सुबह कांंग्रेस प्रतिनिधिमंडल को नज़रबंद किए जाने बाद उन्हें देर रात पुलिस सुरक्षा में हनुमानगढ़ी और राम मंदिर में पूजा-अर्चना करने की अनुमति दे दी गई. इस बीच कांग्रेस ने मंदिर से जुड़े अलग-अलग ट्रस्ट के लोगों, जिनमें चंपत राय और नृपेंद्र मिश्रा भी शामिल हैं – की गिरफ़्तारी की मांग की है. साथ ही योगी आदित्यनाथ सरकार और आरएसएस पर श्रद्धालुओं की आस्था से खिलवाड़ का आरोप लगाया है.

नई दिल्ली: अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा विवाद मामले में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने मंगलवार (30 जून) को मंदिर से जुड़े अलग-अलग ट्रस्ट के लोगों- जिनमें चंपत राय और नृपेंद्र मिश्रा भी शामिल हैं- की गिरफ़्तारी की मांग की है.
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी ने इस मामले में पहले से गिरफ़्तार मंदिर के कर्मचारियों से हिरासत में पूछताछ की भी मांग की है.
पार्टी ने उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष अजय राय के नेतृत्व वाले अपने प्रतिनिधिमंडल को नज़रबंद किए जाने की निंदा करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) पर निशाना साधा.
इस संबंध में कांग्रेस के संचार महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि भाजपा-संघ का एकमात्र सपना है ‘राम नाम जपना, पराया माल अपना.’
मालूम हो कि इससे पहले कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने अयोध्या में एक होटल में पुलिस द्वारा उन्हें नज़रबंद करने का आरोप लगाया था. राय ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक वीडियो भी शेयर किया था, जिसमें दो पुलिसकर्मी नज़र आ रहे थे, जिनमें से एक से अजय राय बातचीत करते दिखाई दे रहे थे.
उल्लेखनीय है कि कांग्रेस ने पहले एक बयान में कहा था कि राय की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल, जिसमें सांसद किशोरी लाल शर्मा, राकेश राठौर, उज्ज्वल रमन सिंह और तनुज पुनिया शामिल थे, मंदिर जाकर दर्शन करने और भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाने वाले थे.
खुद को नज़रबंद किए जाने के बाद राय ने एक बयान में कहा, ‘अयोध्या शहर में चढ़ावे की हेराफेरी और ज़मीन के घोटाले हो रहे हैं. हमारी मांग है कि जो छोटे कर्मचारी जेल भेजे गए हैं, उन्हें पुलिस रिमांड में लेकर उनसे पूछताछ की जाए.’
राय ने आगे कहा कि नृपेंद्र मिश्र, अनिल मिश्र, गोपाल राव, चंपत राय और गोविंद गिरि – इन सभी लोगों के ख़िलाफ़ केस दर्ज होने चाहिए और उन्हें गिरफ़्तार किया जाना चाहिए. ट्रस्ट को तुरंत भंग कर दिया जाना चाहिए और शंकराचार्यों द्वारा नामित लोगों को ट्रस्ट में शामिल किया जाना चाहिए, जो धर्म से जुड़े हों.’
इस संबंध में कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि फंड की कथित चोरी का मतलब है कि मंदिर ट्रस्ट ने चढ़ावे की गिनती के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के साथ तैयार की गई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का उल्लंघन किया है.
श्रीनेत ने उन विभिन्न श्रद्धालुओं की शिकायतों पर भी प्रकाश डाला, जिन्होंने कहा है कि उन्हें अभी तक ट्रस्ट से अपने दान की रसीदें नहीं मिली हैं.
गौरतलब है कि मंगलवार सुबह प्रतिनिधिमंडल को नज़रबंद किए जाने बाद उन्हें देर रात पुलिस सुरक्षा में हनुमानगढ़ी और राम मंदिर में पूजा-अर्चना करने की अनुमति दी गई.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य कांग्रेस मीडिया विभाग के चेयरमैन और पूर्व मंत्री सीपी राय ने कहा, ‘भाजपा सरकार कुछ छिपाने की कोशिश कर रही है; पहले उसने हमारे नेताओं को पूजा-अर्चना करने से रोका और बाद में भारी सुरक्षा के बीच दर्शन की इजाज़त दी. इसके पीछे क्या वजह थी?’
वहीं, अजय राय ने सवाल उठाया कि सरकार भक्तों के साथ भेदभाव कैसे कर सकती है? कुछ दिन पहले ही उन्होंने आम आदमी पार्टी (आप) के नेता अरविंद केजरीवाल के लिए वीआईपी दर्शन का इंतज़ाम किया गया, जबकि हमारे प्रतिनिधिमंडल को दर्शन करने से रोक दिया गया.’
राय ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि ये लोग न सिर्फ़ चढ़ावे की रकम के चोरी में शामिल हैं, बल्कि उन्होंने दर्शन की प्रक्रिया को भी चुनिंदा लोगों तक सीमित कर दिया है.
क्या है पूरा मामला?
अयोध्या के राम जन्मभूमि थाने में 26 जून को मंदिर में चढ़ाए गए नक़द और क़ीमती सामान की चोरी और गबन के मामले में आठ लोगों के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज की गई है. यह एफआईआर, तीन अलग-अलग पुलिस शिकायतों (जिनमें एक पूर्व कार सेवक की शिकायत भी शामिल थी), विशेष जांच दल (एसआईटी) की गंभीर रिपोर्ट और इस मामले पर जनता के भारी विरोध के कई दिनों बाद दर्ज की गई थी.
इस संबंध में कैश गिनने वाले स्टाफ में शामिल सभी आठ आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी.
वहीं, अयोध्या बार एसोसिएशन ने कहा है कि उसके वकील इस मामले में किसी भी आरोपी का बचाव नहीं करेंगे.
मालूम हो कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के दो सीनियर पदाधिकारियों- महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफ़ा दे दिया है, लेकिन एफआईआर में उनके नाम शामिल नहीं हैं.
उल्लेखनीय है कि यह ट्रस्ट सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर बनाया गया था और इसके गठन की घोषणा खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी.
विश्व हिंदू परिषद, जिसके चंपत राय एक वरिष्ठ पदाधिकारी हैं, ने राय और मिश्रा का बचाव किया है और कहा है कि मंदिर ट्रस्ट खुद निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा था.