मॉब लिंचिंग केस में सज़ा देने वाली जज को लगातार मिल रहीं धमकियां, एफआईआर दर्ज. भोपाल

नर्मदापुरम ज़िले की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश तबस्सुम खान ने बीते 12 जून को कथित गो-तस्करी से जुड़े एक मॉब लिंचिंग मामले में 14 लोगों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई थी. इसके बाद सोशल मीडिया पर कई वीडियो और पोस्ट सामने आए, जिनमें न्यायाधीश को उनकी धार्मिक पहचान के आधार पर निशाना बनाया गया और जान से मारने की धमकी दी गई है.

नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम (पूर्व में होशंगाबाद) जिले में पुलिस ने जिला एवं सत्र न्यायालय की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) तबस्सुम खान को कथित रूप से जान से मारने की धमकी देने और उनके खिलाफ सांप्रदायिक टिप्पणियां करने के आरोप में दो अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की है.

न्यायाधीश खान ने हाल ही में कथित गो-तस्करी से जुड़े एक मॉब लिंचिंग मामले में 14 लोगों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई थी.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सिवनी मालवा थाना पुलिस ने शनिवार को स्वतः संज्ञान लेते हुए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 302 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से शब्द या संकेत का प्रयोग) और धारा 196 (विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाना) के तहत मामला दर्ज किया.

थाना प्रभारी सुधाकर बरास्कर ने बताया कि यह कार्रवाई केंद्रीय गृह मंत्रालय के साइबर सेल द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत भेजे गए नोटिस के बाद की गई.

बरास्कर ने बताया कि सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट और वीडियो सामने आने के बाद मामला दर्ज किया गया.

उन्होंने कहा, ‘एक कथित वीडियो में एक व्यक्ति ने धमकी दी कि अगर 14 दोषियों को 10 दिनों के भीतर रिहा नहीं किया गया तो हिंसा की जाएगी. एक अन्य वीडियो में एक महिला ने जज के ख़िलाफ़ सांप्रदायिक टिप्पणी की और चेतावनी दी कि उन्हें इस फ़ैसले के नतीजे भुगतने होंगे.’

उन्होंने बताया कि दोनों आरोपियों की पहचान करने के प्रयास जारी हैं.

ये धमकियां उस फैसले के बाद सामने आईं, जिसमें 12 जून को एडीजे तबस्सुम खान ने कथित गो-तस्करी से जुड़े मॉब लिंचिंग मामले में 14 आरोपियों को हत्या, हत्या के प्रयास, दंगा और ग़लत तरीके से रोकने का दोषी ठहराते हुए सभी को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई थी.

इंडियन एक्सप्रेस के की रिपोर्ट के अनुसार, फैसले के तुरंत बाद अदालत परिसर के बाहर तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जब दोषियों के परिजनों ने उन्हें जेल ले जा रही पुलिस की गाड़ी को रोकने की कोशिश की.

फैसले के बाद के सोशल मीडिया पर कई वीडियो और पोस्ट सामने आए, जिनमें न्यायाधीश को उनकी धार्मिक पहचान के आधार पर निशाना बनाया गया.

कुछ वीडियो में उम्रकैद की सज़ा को रद्द करने की मांग करते हुए प्रदर्शन करते दिखाए गए, जिसमें जज पर धर्म के आधार पर फ़ैसला लेने का आरोप लगाया गया. कुछ विरोध प्रदर्शनों में जज के पुतले जलाए जाने के वीडियो भी सामने आए.

यह मामला 3 अगस्त 2022 का है. उस दिन महाराष्ट्र के अमरावती में लगने वाले एक मेले के लिए 30 मवेशियों को ले जा रहे एक ट्रक को सिवनी मालवा के बराखड़ गांव के पास रोक लिया गया था. आरोप है कि भीड़ ने ट्रक में सवार तीन लोगों पर लाठियों और लोहे की रॉड से हमला कर दिया, जिसमें नज़ीर अहमद की मौत हो गई.

पुलिस के अनुसार, हमले में गांव के कुछ लोग और स्वयंभू गोरक्षक शामिल थे. घटना का एक कथित वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था.

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, इस पूरे अभियान की कानूनी बिरादरी के लोगों और सार्वजनिक हस्तियों ने आलोचना की है. उन्होंने न्यायिक फ़ैसले को सांप्रदायिक रंग देने और अपने कर्तव्यों का पालन करने के लिए एक न्यायिक अधिकारी को निशाना बनाने की कोशिशों पर चिंता जताई है.

इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा, ‘आमतौर पर नफ़रत फैलाने वालों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाती है, लेकिन मोदी के भारत में नफ़रत फैलाने वाले खुलेआम घूम रहे हैं. साइबर सेल दंडात्मक कार्रवाई करने के बजाय केवल नोटिस भेज रहा है.’

खेड़ा ने कहा, ‘सभी दोषी हिंदू पुरुष हैं. लेकिन उन्हें उनके धर्म की वजह से दोषी नहीं ठहराया गया, उन्हें इसलिए दोषी ठहराया गया क्योंकि जांच में वे दंगा करने, हत्या की कोशिश और हत्या के दोषी पाए गए.’

वहीं, भाजपा प्रवक्ता हितेश बाजपेयी ने कहा, ‘पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज कर लिया है. आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.’