सीधी जिले के रामपुर नैकिन विकासखंड के शिक्षक दयाशंकर द्विवेदी ने रचा इतिहास.सीधी.

वर्ल्ड रिकॉर्ड्स इंडिया एवं मैजिक बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज हुआ नाम, दिल्ली-एनसीआर में वर्ल्ड रिकॉर्ड अवॉर्ड से हुए सम्मानित
मंगल भारत/सीधी। रामपुर नैकिन विकासखंड के अंतर्गत ग्राम पंचायत बड़खरा-740 में जन्मे और वर्तमान में उत्कृष्ट विद्यालय रामपुर नैकिन में पदस्थ शिक्षक दयाशंकर द्विवेदी ने अपनी सामाजिक सोच, पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पण और जन-जागरूकता अभियान के दम पर विश्व स्तर पर पहचान बनाई है। उनके द्वारा संचालित व्यापक पर्यावरण जन-जागरूकता अभियान को वर्ल्ड रिकॉर्ड्स इंडिया एवं मैजिक बुक ऑफ रिकॉर्ड ने मान्यता प्रदान करते हुए उनका नाम दर्ज किया है। इस उपलब्धि के लिए उन्हें 11 जुलाई 2026 को दिल्ली-एनसीआर (फरीदाबाद) में आयोजित भव्य समारोह में वर्ल्ड रिकॉर्ड अवॉर्ड से सम्मानित किया गया.

दयाशंकर द्विवेदी वर्षों से शिक्षा के साथ-साथ समाजहित के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान उन्होंने अपनी मोटरसाइकिल को “कोरोना रथ” बनाकर गांव-गांव जाकर लोगों को संक्रमण से बचाव और जागरूकता का संदेश दिया। इसके बाद जनगणना 2026-27, मतदाता सूची पुनरीक्षण और अन्य शासकीय अभियानों में भी उन्होंने नवाचार के माध्यम से लोगों को जागरूक किया।
उनकी सबसे बड़ी पहचान “संकल्प से समाधान” पर्यावरण जन-जागरूकता अभियान बना। इस अभियान की शुरुआत 27 मई 2026 को उनके पैतृक ग्राम बड़खरा-740 से हुई। उन्होंने संकल्प लिया कि वे एक लाख लोगों तक पहुँचकर जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और प्रत्येक व्यक्ति से कम से कम एक पौधा लगाने का आग्रह करेंगे।
इसके बाद उन्होंने लगातार गांवों, कस्बों, रेलवे स्टेशनों, प्रशिक्षण संस्थानों, जनकल्याण शिविरों, मेलों और सार्वजनिक स्थानों पर पहुँचकर लोगों को जल संरक्षण, वृक्षारोपण, स्वच्छता, कचरा प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण और सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया। मात्र 24 दिनों में उन्होंने एक लाख से अधिक लोगों तक अपना संदेश पहुँचाने का लक्ष्य पूरा किया। इसकी घोषणा 18 जून 2026 को सीधी में आयोजित जनकल्याण शिविर में सांसद डॉ. राजेश मिश्रा सहित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों की उपस्थिति में की गई.

दयाशंकर द्विवेदी के कार्यों की चर्चा लगातार प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में होती रही। उनके अभियान का सत्यापन करने के बाद 4 जुलाई 2026 को वर्ल्ड रिकॉर्ड्स इंडिया ने आधिकारिक रूप से उन्हें मान्यता प्रदान की। इसके बाद दिल्ली-एनसीआर में आयोजित सम्मान समारोह में उन्हें वर्ल्ड रिकॉर्ड अवॉर्ड प्रदान किया गया तथा उनका नाम मैजिक बुक ऑफ रिकॉर्ड में भी दर्ज किया गया।
सम्मान समारोह का सबसे भावुक क्षण तब आया, जब दयाशंकर द्विवेदी अपनी 78 वर्षीय माता श्रीमती कृष्णा द्विवेदी को साथ लेकर मंच पर सम्मान ग्रहण करने पहुँचे। उन्होंने कहा कि उनके दिवंगत पिता और माताजी से मिले संस्कार ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी हैं। इसलिए इस उपलब्धि का सबसे बड़ा श्रेय उनकी माताजी को जाता है। उनका यह भाव उपस्थित लोगों के लिए प्रेरणा का संदेश बन गया।
शिक्षक दयाशंकर द्विवेदी की इस उपलब्धि पर सीधी जिले सहित पूरे मध्य प्रदेश में हर्ष का वातावरण है। जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, शिक्षकों, कर्मचारियों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने उन्हें शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे सीधी जिले और मध्य प्रदेश का गौरव है।
पर्यावरण संरक्षण और समाज सेवा के क्षेत्र में किया गया उनका कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है। उनकी यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि यदि संकल्प मजबूत हो, तो एक शिक्षक भी पूरे समाज में परिवर्तन की अलख जगा सकता है
शिक्षक दयाशंकर द्विवेदी से जब इस बारे में चर्चा हुई तो उनके द्वारा बताया गया कि मैं भविष्य को चिंतन करते हुए शुरूआत किया था मेरा कोई सोच संकल्प मात्र नहीं था कि मैं बर्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज हो जाएगा लेकिन इलेक्ट्रॉनिक प्रिंट मीडिया की वजह से मैं दिल्ली तक मेरा संदेश पहुंचा जिनका मैं धन्यवाद देता हूं