सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ पुलिस कार्रवाई न करने के समझौते का पूरी तरह उल्लंघन हो रहा है. अगर प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ दर्ज एफआईआर वापस नहीं ली गईं, तो हम दोबारा आंदोलन पर बैठने को मजबूर होंगे.
हाल ही में पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था की गड़बड़ियों को लेकर सरकार से जवाबदेही की मांग करते हुए देशव्यापी युवा आंदोलन का नेतृत्व करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अपना आंदोलन वापस ले लिया था.
सोमवार (27 जुलाई) को पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई न करने के समझौते का पूरी तरह उल्लंघन हो रहा है. अगर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस नहीं ली गईं, तो हम दोबारा आंदोलन पर बैठने को मजबूर होंगे.
रांका ने लिखा, ‘हम देख रहे हैं कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई न करने को लेकर जो सहमति बनी थी, उसका पूरी तरह उल्लंघन किया जा रहा है. बिहार और पश्चिम बंगाल में सैकड़ों छात्रों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि दिल्ली और अन्य राज्यों में सैकड़ों छात्रों और प्रदर्शनकारियों की निगरानी की जा रही है और उन्हें परेशान किया जा रहा है. दिल्ली से ऐसी कई रिपोर्टें भी सामने आ रही हैं कि प्रदर्शनकारियों को भोजन, पानी और अन्य जरूरी सहायता उपलब्ध कराने वाले वालंटियर को हिरासत में लिया जा रहा है.
‘हम मांग करते हैं कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर तत्काल वापस ली जाएं, गिरफ्तार छात्रों को रिहा किया जाए और हमारी सहमति के अनुरूप दिल्ली पुलिस, केंद्रीय जांच एजेंसियां तथा भाजपा और उसके सहयोगी दलों द्वारा शासित राज्यों की पुलिस भविष्य में किसी भी प्रदर्शनकारी के खिलाफ कोई नई एफआईआर दर्ज न करे. यदि ऐसा नहीं किया गया, तो हम फिर से आंदोलन पर बैठने के लिए मजबूर होंगे.’
सीजेपी प्रवक्ता ने यह भी लिखा, ‘हम यह भी मांग करते हैं कि कानूनी मामलों को लेकर सरकार के साथ हुई लिखित सहमति और भारत सरकार द्वारा तय समय-सीमा के अनुरूप उसका दस्तावेज हमें कल तक उपलब्ध कराया जाए.’
इससे पहले पार्टी ने एक बयान जारी कर केंद्र सरकार को उस आश्वासन की याद दिलाई थी, जिसमें कहा गया था कि किसी भी राज्य में आंदोलन में शामिल प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी. यह बयान ऐसे समय आया है जब बिहार, पश्चिम बंगाल और असम सहित कई राज्यों से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की खबरें सामने आई हैं.
सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने एक्स पर जारी बयान में कहा, ‘हमें कई राज्यों, खासकर असम, पश्चिम बंगाल और बिहार से ऐसी खबरें मिल रही हैं कि छात्रों और अन्य प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाया जा रहा है, उन्हें हिरासत में लिया जा रहा है या गिरफ्तार किया जा रहा है. कॉकरोच जनता पार्टी ने अपना देशव्यापी आंदोलन केवल भारत सरकार के इस आश्वासन के बाद वापस लिया था कि भाजपा या एनडीए शासित किसी भी राज्य में, न अभी और न भविष्य में, किसी भी प्रदर्शनकारी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी. इसलिए इन राज्यों से आ रही खबरें गंभीर चिंता का विषय हैं.’
बयान में आगे कहा गया, ‘हम भारत सरकार, विशेष रूप से जे.पी. नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह से आग्रह करते हैं कि वे हमें दिए गए आश्वासन का तुरंत पालन करें. इसके लिए हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि देश में कहीं भी किसी प्रदर्शनकारी के खिलाफ कोई दमनात्मक या प्रतिशोधात्मक कार्रवाई न हो. दर्ज की गई एफआईआर भी वापस ली जानी चाहिए.’
सीजेपी ने सरकार से मांग की है कि वह मंगलवार (28 जुलाई) तक इस आश्वासन को लिखित रूप में दे.
पार्टी ने कहा, ‘देशव्यापी आंदोलन स्थगित करने का हमारा फैसला पूरी सद्भावना के साथ और केवल सरकार के इस आश्वासन पर भरोसा करके लिया गया था कि वह अपने वादे पर कायम रहेगी. यदि सरकार इस आश्वासन से पीछे हटती है तो यह सिर्फ कॉकरोच जनता पार्टी के साथ विश्वासघात नहीं होगा, बल्कि उन लाखों युवाओं के साथ भी विश्वासघात होगा जिन्होंने आंदोलन के बजाय संवाद का रास्ता चुना. ऐसा विश्वासघात युवाओं के लिए पूरी तरह अस्वीकार्य होगा.’
20 जुलाई को दिल्ली में बड़े पैमाने पर शांतिपूर्ण रहे युवा आंदोलन को दबाने के लिए पुलिस द्वारा की गई कथित बर्बर कार्रवाई की व्यापक रिपोर्टिंग हुई थी और उसके वीडियो भी सामने आए थे. इसके बाद विभिन्न राज्यों में छात्रों के समर्थन में प्रदर्शन करने वालों की कथित अवैध हिरासत और गिरफ्तारियों की खबरें भी सामने आईं, जबकि केंद्र सरकार ने आश्वासन दिया था कि एनडीए शासित राज्यों में ऐसे मामले दर्ज नहीं किए जाएंगे.
पश्चिम बंगाल
मध्य कोलकाता में प्रदर्शन के हिंसक होने के बाद सुवेंदु अधिकारी सरकार ने नए ‘एंटी-गुंडा’ कानून का सहारा लिया. यह कानून बिना ट्रायल के अधिकतम 12 महीने तक एहतियाती हिरासत की अनुमति देता है.
द वायर ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि 24 जुलाई को हिंसा कैसे भड़की और मुख्यमंत्री ने इस कानून के पहली मर्तबा इस्तेमाल की घोषणा करते हुए धर्म-आधारित संकेत देने वाले ‘फ्राइडे पीपल’ शब्द का इस्तेमाल किया.
बताया गया कि अधिकांश समय शांतिपूर्ण रहा जुलूस जैसे ही डोरीना क्रॉसिंग पहुंचा, वहां पुलिस पर जूते, बोतलें और ईंटें फेंकी गईं. कई पत्रकारों को भी कथित तौर पर निशाना बनाया गया. हालांकि, वामपंथी छात्र संगठनों का आरोप है कि हिंसा भड़काने के लिए सत्तारूढ़ दल से जुड़े लोगों ने जुलूस में घुसपैठ की थी.
इसके बाद कोलकाता पुलिस ने कहा कि 70 लोगों की पहचान की गई है और सात मामले दर्ज किए गए हैं, छह हेयर स्ट्रीट थाने में और एक एंटाली थाने में. अधिकारी ने कहा, ‘यह सब उन ‘फ्राइडे पीपल’ ने किया,’ जिसे मुसलमानों की ओर इशारा माना गया, क्योंकि वे शुक्रवार को नमाज अदा करते हैं. गिरफ्तार किए गए लगभग सभी लोग मुस्लिम हैं.
कुछ ख़बरों में दावा किया गया है कि गिरफ्तार लोगों की संख्या इससे अधिक हो सकती है.
असम
असम के लखीमपुर जिले में 23 जुलाई को पुलिस ने तीन युवकों को देशव्यापी युवा आंदोलन के समर्थन में प्रदर्शन आयोजित करने की कोशिश के आरोप में गिरफ्तार किया था.
गिरफ्तार किए गए युवकों- 23 वर्षीय मंजूर रहमान, 21 वर्षीय अशरफुल इस्लाम और 23 वर्षीय अब्दुल कासेम ने इस्लामपुर गांव में आंदोलन के समर्थन में शांतिपूर्ण प्रदर्शन आयोजित करने के लिए एक वॉट्सऐप ग्रुप बनाया था.
इन युवकों के परिजनों ने द वायर को बताया कि गिरफ्तारी से पहले उन्होंने प्रदर्शन की अनुमति के लिए पुलिस से आवेदन किया था, लेकिन प्रशासन ने इसकी इजाजत नहीं दी.
तीनों पर भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने, अलगाववाद को उकसाने, सशस्त्र विद्रोह और अलगावबाद गतिविधियों से जुड़े आरोप लगाए गए हैं.
बिहार
प्रभात खबर की एक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से पहले बिहार में शनिवार को आयोजित राज्यव्यापी बंद से जुड़े मामले में लगभग 450 लोगों को गिरफ्तार किया गया है.
अखबार के मुताबिक, पटना सहित कई जिलों में पुलिस ने पहचान किए गए प्रदर्शनकारियों की तस्वीरें और पोस्टर भी जारी किए हैं.
अन्य राज्यों की घटनाएं
द हिंदू की एक रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले में एक सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, भारतीय जनता पार्टी और दिल्ली पुलिस के खिलाफ कथित रूप से ‘अत्यंत अपमानजनक’ भाषा का इस्तेमाल करने पर मामला दर्ज किया गया है.
स्थानीय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर यशपाल सोनी के खिलाफ 23 जुलाई को एक इंस्टाग्राम रील के संबंध में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 296(ए) (सार्वजनिक स्थान पर अश्लील कृत्य) और धारा 352 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना) के तहत मामला दर्ज किया गया. यह कार्रवाई स्थानीय भाजपा नेताओं द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर की गई.
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में पुलिस ने सीजेपी के वालंटियर मोहम्मद जुनैद के परिवार के सदस्यों को हिरासत में लिया था. जुनैद 6 जून से दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को भोजन, पानी और अन्य सहायता उपलब्ध करा रहे थे.
इंडिया टुडे समूह से संबद्ध वेबसाइट लल्लनटॉप की एक रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने उनकी तलाश के दौरान परिवार के निजी दस्तावेज भी जब्त कर लिए थे. हालांकि, बाद में सीजेपी ने स्पष्ट किया कि जुनैद का परिवार सुरक्षित है और अब हिरासत में नहीं है.
