देश से संयम की अपील के बीच प्रधानमंत्री की भव्य रैलियां, रोड शो जारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की देशवासियों से विभिन्न तरह की कटौती की अपील के बाद उनके कई शहरों के दौरों को लेकर सवाल उठ रहे हैं. जिस रविवार पीएम नागरिकों से ‘संकट के समय’ में ‘सामूहिक त्याग’ की बात कही, उसी दिन उन्होंने तीन राज्यों के चार शहरों में भव्य व्यवस्था वाले समारोहों में हिस्सा लिया. सोमवार को भी उनके ऐसे कार्यक्रम जारी हैं.

नई दिल्ली/मुंबई: चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में संपन्न हुए चुनावों के महज़ कुछ दिनों बाद रविवार (10 मई) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया संकट के चलते उत्पन्न हुए आर्थिक दबाव को लेकर अपने भाषण में भारत के लोगों से पेट्रोल और डीज़ल को लेकर किफ़ायत बरतने की अपील की. साथ ही एक साल तक सोना न ख़रीदने और खाने का तेल कम इस्तेमाल करने का भी आग्रह किया. इसके अलावा उन्होंने इस दौरान जहां तक संभव हो घर से काम करने (वर्क फ्रॉम होम), वर्चुअल मीटिंग करने और लोगों से विदेश यात्रा टालने की भी बात कही.

हालांकि, पीएम मोदी की इन तमाम अपील के बीच उनकी खुद की कथनी और करनी में स्पष्ट विरोधाभास नज़र आया. जिस रविवार के दिन प्रधानमंत्री ने लोगों से ‘संकट के समय’ में ‘अपने कर्तव्यों को सर्वोपरि मानते हुए देशवासियों से सामूहिक त्याग’ की बात कही, उसी दिन उनके कार्यक्रमों में भव्य राजनीतिक व्यवस्था देखी गई, जो साफ तौर पर उनकी कही गई बातों से मेल नहीं खा रही थी.

उल्लेखनीय है कि इसी रविवार को पीएम मोदी ने अपने दिन की शुरुआत बेंगलुरु में की, जहां उन्होंने ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ की 45वीं वर्षगांठ के समारोह सहित कई कार्यक्रमों में भाग लिया.

इसके बाद वे हैदराबाद के लिए रवाना हुए और दोपहर करीब 2:20 बजे बेगमपेट हवाई अड्डे पर पहुंचे. कुछ ही देर बाद उन्होंने सड़क, रेलवे, पेट्रोलियम टर्मिनल, कपड़ा और औद्योगिक क्षेत्रों से संबंधित परियोजनाओं का शुभारंभ और शिलान्यास समारोहों में भाग लिया.

इनमें से कोई भी कार्यक्रम शासन के लिए इतना जरूरी नहीं था कि उनकी प्रत्यक्ष उपस्थिति अनिवार्य हो. इसके अलावा इन्हें नई दिल्ली स्थित उनके कार्यालय से वर्चुअल रूप से भी आयोजित किया जा सकता था.

इन सभी कार्यकम्रों में हिस्सा लेने के बाद पीएम हेलीकॉप्टर से हाईटेक सिटी गए, जहां उन्होंने सिंधु अस्पताल का उद्घाटन किया. यह एक विशाल निजी, गैर-लाभकारी मल्टी-स्पेशलिटी अस्पताल है, जिसे राज्यसभा सदस्य और हेटेरो ग्रुप के संस्थापक बंदी पार्थसारथी रेड्डी द्वारा स्थापित किया गया है. इस कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने संस्थापक के परिवार से भी मुलाकात की.

इसके बाद पीएम मोदी सिकंदराबाद के परेड ग्राउंड पहुंचे, जहां उन्होंने भाजपा की एक जनसभा को संबोधित किया. यहां उन्होंने एकत्रित जनसमूह को ‘संकट के समय में कटौती’ का संदेश दिया. वे शाम लगभग 7 बजे हैदराबाद से गुजरात के जामनगर के लिए रवाना हुए, जहां उन्होंने एक और जनसभा को संबोधित किया.

जाहिर है पीएम मोदी के एक ही दिन के कार्यक्रम में कई सारी उड़ानें, एक प्रमुख शहर में हेलीकॉप्टर से जाना, उच्च सुरक्षा व्यवस्था के साथ व्यापक ज़मीनी यात्राएं और पार्टी द्वारा महत्वपूर्ण स्थानीय लामबंदी की आवश्यकता वाली एक बड़ी जनसभा शामिल थी. ऐसे में ये सभी गतिविधियां ईंधन की बचत और आवाजाही में कटौती के उस सिद्धांत बिल्कुल उलट थीं, जिसकी अपील वे आम नागरिकों को भाषण देते हुए कर रहे थे.

इसी तरह कटौती और संयम बरतने के भाषण के ठीक एक दिन बाद भी सोमवार (11 मई) को प्रधानमंत्री मोदी ने अपना खर्चीला और व्यस्त कार्यक्रम जारी रखा. वे गुजरात के जामनगर से सुबह जल्दी रवाना होकर वेरावल में सोमनाथ मंदिर में एक भव्य समारोह में भाग लेने के लिए पहुंचे.

यहां उन्होंने दर्शन, पूजा और सहित कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया, जिसमें गिर सोमनाथ जिले का एक रोड शो भी शामिल है, जिसके बाद वे शाम को वडोदरा के लिए उड़ान भरेंगे, जहां वे शाम लगभग 6 बजे सरदारधाम छात्रावास का उद्घाटन करेंगे और स्थानीय सभाओं को संबोधित करेंगे.

समारोहों की भव्यता

इसके बाद, मंगलवार (12 मई) को पीएम मोदी असम में हिमंता बिस्वा शर्मा के नेतृत्व वाली नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए गुवाहाटी के लिए उड़ान भरने वाले हैं.

समारोह की भव्यता को लेकर आ रही खबरों से ऐसा संकेत मिल रहा है कि पीएम मोदी की अपील को उनकी अपनी पार्टी में ही कुछ खास असर नहीं हुआ है.

डेक्कन हेराल्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, असम भाजपा प्रमुख दिलीप सैकिया ने घोषणा की है कि राज्यभर से लगभग एक लाख लोगों के इस कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना है. सैकिया ने कहा कि समारोह एक ‘शानदार आयोजन’ होने वाला है.

खबरों के मुताबिक, इसमें प्रधानमंत्री के साथ-साथ भाजपा शासित विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों के भी आने की उम्मीद है. इसमें अतिरिक्त हवाई यात्रा, सड़क काफिले, सुरक्षा व्यवस्था और बड़े पैमाने पर लोगों के एकत्र होने संबंधी गतिविधियां शामिल होंगी, जो रविवार को नागरिकों से ईंधन का कम से कम उपयोग करने, गैर-जरूरी यात्रा से बचने और वर्चुअल माध्यम से जुड़ने के प्रधानमंत्री के आह्वान के बिल्कुल विपरीत हैं.
यह विरोधाभास स्पष्ट है: पीएम मोदी ने मध्यमवर्गीय परिवारों से विदेश यात्राएं रद्द करने, शादियों में सोने की खरीद में कटौती करने, निजी वाहनों का उपयोग कम करने और वर्क फ्रॉम होम करने का आग्रह किया, जबकि उनकी अपनी यात्रा व्यापक हवाई और हेलीकॉप्टर यात्रा पर आधारित थी और इसमें बड़ी संख्या में लोग व्यक्तिगत रूप से शामिल हुए.

मालूम हो कि प्रधानमंत्री की निजी और आधिकारिक जीवनशैली में लंबे समय से व्यापक घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्राएं, बड़े काफिले और सुनियोजित सार्वजनिक कार्यक्रम शामिल रहे हैं. सुरक्षा और प्रोटोकॉल के लिए संसाधनों की आवश्यकता होती है, लेकिन राज्य और पार्टी के महत्वपूर्ण संसाधनों से समर्थित मंच से आम लोगों को कटौती का उपदेश देना सवालों के दायरे में आता है.

गौरतलब है कि पिछले एक सप्ताह में ही पीएम मोदी ने पांच रोड शो किए हैं और कई राजनीतिक कार्यक्रमों में भाग लिया है जिनमें काफी खर्च और संसाधन लगे हैं: 7 मई को वे बिहार सरकार के नवनियुक्त मंत्रियों के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए थे, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार भी शामिल थे. उसी दिन उन्होंने पटना में रोड शो भी किया था.

इसके बाद 9 मई को वे पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और उनके मंत्रिमंडल के पांच अन्य मंत्रियों के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने के लिए कोलकाता गए थे, जहां उन्होंने रोड शो भी किया था. तब से उन्होंने हैदराबाद, जामनगर और सोमनाथ में तीन रोड शो किए हैं.

ऐसे में जब देश आर्थिक कुप्रबंधन और बाहरी झटकों से जूझ रहा है, ऐसे में नेतृत्व के उदाहरण और जनता को दी गई सलाह में निरंतरता विश्वसनीयता के लिए महत्वपूर्ण है.

एक ओर 10 मई को प्रधानमंत्री ने आम नागरिकों को कटौती का स्पष्ट संदेश दिया, तो वहीं दूसरी ओर उस दिन और 11 मई को गुजरात भर में आयोजित मंदिर कार्यक्रमों, रोड शो और उद्घाटन समारोहों के साथ उनकी खुद की दिनचर्या में कथनी और करनी के बीच का अंतर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है.