सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उस याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें 20 जुलाई को ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई का मुद्दा उठाया गया था. सीजेआई सूर्यकांत ने एक वकील द्वारा दाखिल इस याचिका पर कहा, ‘अपना और हमारा समय बर्बाद मत कीजिए.’
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, जिनकी युवाओं के एक वर्ग को ‘कॉकरोच’ बताने वाली टिप्पणी ने सड़क से एक ऐसा आंदोलन शुरू कर दिया, जिसकी गूंज अब संसद तक पहुंच गई है- ने बुधवार (22 जुलाई) को कहा कि उन्हें 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की बर्बरता के वीडियो देखने में कोई दिलचस्पी नहीं है और उन्होंने याचिकाकर्ता से अदालत का समय बर्बाद न करने को कहा.
सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें ‘संसद चलो’ मार्च के दिन 20 जुलाई को दिल्ली पुलिस द्वारा मुख्य रूप से युवा प्रदर्शनकारियों की भीड़ पर अत्यधिक बल प्रयोग का मुद्दा उठाया गया था.
मालूम हो कि लगभग 75,000 लोगों वाले इस मार्च से पहले ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के बैनर तले लगभग एक महीने से दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन जारी हैं. पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में तमाम गड़बड़ियों के खिलाफ युवा सरकार की जवाबदेही और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं.
इस दौरान पर्यावरणविद् व इनोवेटर सोनम वांगचुक और वामपंथी छात्र संगठनों से जुड़े छात्रों ने भूख हड़ताल भी की. वांगचुक का अनशन अभी भी जारी है और यह 25वें दिन में है.
बता दें कि इस पार्टी का नाम और प्रेरणा सीजेआई सूर्यकांत की 15 मई की उस टिप्पणी से मिली थी, जिसमें उन्होंने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा था, ‘समाज में पहले से ही ऐसे परजीवी मौजूद हैं जो व्यवस्था पर हमला करते हैं. क्या आप भी उनके साथ जुड़ना चाहते हैं? कुछ युवा ऐसे हैं, जो रोज़गार नहीं मिलने और पेशे में जगह न बना पाने के कारण कॉकरोच की तरह हर जगह फैल जाते हैं.’
उल्लेखनीय है कि युवाओं के 20 जुलाई के संसद मार्च पर सुरक्षा बलों ने जोरदार लाठीचार्ज किया था. इस दौरान पैलेट गन और कील लगी लाठियों के इस्तेमाल के आरोप भी लगे- हालांकि पुलिस ने इन दोनों ही आरोपों से इनकार किया है.
पुलिस की इस कार्रवाई में कई लोग घायल हुए हैं; वहीं, सुरक्षा बलों द्वारा बेरहमी से की गई मारपीट और आंसू गैस का इस्तेमाल भी कैमरे में कैद हुआ है, जिसकी व्यापक आलोचना की जा रही है.
22 जुलाई को जब अभी भी कई पीड़ित युवाओं का इलाज चल रहा हैं, सीजेआई ने प्रदर्शनकारियों पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई संबंधित याचिका का ज़िक्र करने वाले वकील से कहा, ‘हमारा समय बर्बाद न करें और अपना समय भी बर्बाद न करें.’
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, जब वकील ने कहा कि छात्र नीट परीक्षा के सही तरीके से आयोजन और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी में सुधार जैसे अहम मुद्दे उठा रहे हैं, इस पर सीजेआई ने वकील की बात बीच में ही रोक दी और कहा, ‘आपका बहुत-बहुत धन्यवाद.’
जब वकील ने कहा कि ऐसे वीडियो हैं जिनमें पुलिस को ज़रूरत से ज़्यादा बल का इस्तेमाल करते हुए दिखाया गया है, इस पर सीजेआई ने कहा: ‘हमें वीडियो में कोई दिलचस्पी नहीं है; हमारे पास उन्हें देखने का समय नहीं है.’
ज्ञात हो कि इससे एक दिन पहले, जब एक याचिकाकर्ता ने दिल्ली हाईकोर्ट से प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ पुलिस द्वारा ज़रूरत से ज़्यादा बल प्रयोग के आरोपों वाली याचिका को लिस्ट करने का अनुरोध किया था, तब उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने कहा था, ‘कोर्ट को इन सब चीज़ों में न घसीटें.’
गौरतलब है कि यह बात बेहद अजीब लगती है कि भारत जैसी न्यायिक व्यवस्था वाले देश में जहां मामलों में फ़ैसला आने में अक्सर बहुत समय लगता है, मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) यह कहें कि कोर्ट के पास नागरिकों पर पुलिस के ज़रूरत से ज़्यादा बल प्रयोग के वीडियो देखने का समय नहीं है
उदाहरण के लिए, इसी महीने की शुरुआत में खुद सीजेआई की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच ने कॉमेडियन समय रैना और अन्य लोगों के ‘इंडियाज़ गॉट लेटेंट’ शो में किए गए मज़ाक- जिसमें शारीरिक रूप से अक्षम लोगों को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी हुई थी, से जुड़े एक मामले की सुनवाई की थी.
