प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया संकट के बीच देशवासियों से सोना न ख़रीदने, विदेश यात्रा कम करने, पेट्रोल का कम इस्तेमाल करने और ‘वर्क फ्रॉम होम’ की अपील की है. इसके अलावा खाना पकाने के तेल की कम खपत, उर्वरकों का कम उपयोग का आग्रह भी किया है. विपक्ष ने इसकी कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि पीएम मोदी को चुनाव ख़त्म होते ही संकट की याद आ गई.

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में संपन्न हुए चुनावों के कुछ दिनों बाद रविवार (10 मई) को सिकंदराबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए पश्चिम एशिया संकट के बीच देशवासियों से सोना न ख़रीदने, विदेश यात्रा कम करने, पेट्रोल कम इस्तेमाल करने और वर्क फ्रॉम होम की अपील की है.
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत के लिए यह ‘संकट का समय’ है और यह ‘अपने कर्तव्यों को सर्वोपरि मानते हुए कुछ संकल्प लेने’ का क्षण है.
पीएम मोदी ने इस दौरान नागरिकों से जीवाश्म ईंधन की खपत कम करने, अनावश्यक आयात से बचने और अधिक ‘आत्मनिर्भर’ आदतें अपनाने का आग्रह किया – विशेष रूप से लोगों से विदेशी मुद्रा बचाने की अपील की. उन्होंने कहा कि इन संकल्पों को ‘पूरी निष्ठा’ के साथ पूरा किया जाना चाहिए.
डीडी न्यूज़ के अनुसार पीएम मोदी ने कहा, ‘आप पूरी दुनिया में चुनौतियों को देख रहे हैं. पश्चिम एशिया में संकट जारी है और युद्ध का असर वैश्विक स्तर पर महसूस किया जा रहा है. भारत भी इस स्थिति से प्रभावित है.’
उल्लेखनीय है कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार फिलहाल 2021 के उच्चतम स्तर से काफी नीचे है, जो लगभग 690 अरब अमेरिकी डॉलर है. इस वित्तीय वर्ष में इसमें दो बार बड़ी गिरावट आई है, पहली बार लगभग 10 अरब अमेरिकी डॉलर और दूसरी बार लगभग 7.7 अरब अमेरिकी डॉलर की.
इस पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री ने आम नागरिकों से कुछ ‘वादे’ करने को कहा, जिनमें एक वर्ष के लिए अपनी जीवनशैली में बदलाव लाना शामिल है, जिससे देश को इस संकट से पार पाने में मदद की जा सके.
उनके भाषण का अधिकांश भाग आर्थिक समायोजन को व्यक्तिगत व्यवहार परिवर्तन के रूप में प्रस्तुत करता है, जिसमें परिवारों, श्रमिकों और उपभोक्ताओं से खर्च (खाना पकाने के माध्यम सहित) और गैर-जरूरी आयात में कटौती करने का आह्वान किया गया है, और किसानों से उर्वरक के उपयोग में भारी कमी करने को कहा गया है.
हालांकि, प्रधानमंत्री की इस अपील की कड़ी आलोचना करते हुए विपक्ष ने कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध के तीन महीने बाद भी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है.
विपक्ष ने कहा- चुनाव ख़त्म होते ही संकट याद आ गया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक बचत को लेकर की गई अपील पर विपक्षी दलों ने हमला बोला. कांग्रेस ने राज्य चुनाव खत्म होने के तुरंत बाद दिए गए पीएम के बयान पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है.
पीएम मोदी के बयान को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रतिक्रिया दी है. राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि ये नाकामी का सबूत है, अब जनता को यह बताना पड़ रहा कि क्या ख़रीदें और क्या नहीं.
राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा, ‘मोदी जी ने कल जनता से त्याग मांगे- सोना मत खरीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम जलाओ, खाद और खाने का तेल कम इस्तेमाल करो, मेट्रो में चलो, घर से काम करो. ये उपदेश नहीं, ये नाकामी के सबूत हैं.’
उन्होंने आगे लिखा, ’12 साल में देश को इस मुक़ाम पर ला दिया है कि जनता को बताना पड़ रहा है- क्या ख़रीदें, क्या न खरीदें, कहां जाएं, कहां न जाएं. हर बार ज़िम्मेदारी जनता पर डाल देते हैं ताकि ख़ुद जवाबदेही से बच निकलें. देश चलाना अब कॉम्प्रोमाइज्ड पीएम के बस की बात नहीं.’
कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने पीएम मोदी के बयान की निंदा करते हुए कहा कि पीएम मोदी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए आपातकालीन कदम उठाने की जगह जनता को ही मुश्किल में डाल रहे हैं.
केसी वेणुगोपाल ने एक्स पर लिखा, ‘यह बेहद शर्मनाक, गैर-ज़िम्मेदाराना और पूरी तरह से अनैतिक है कि पीएम इस वैश्विक संकट से हमारी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए कोई आपातकालीन योजना बनाने के बजाय, आम नागरिकों को ही मुश्किल में डाल रहे हैं.’
उन्होंने आगे कहा, ‘जब चुनाव और ओछी राजनीति ही पीएम की एकमात्र प्राथमिकता बन जाती है, तो इसका अंतिम परिणाम एक आसन्न आर्थिक तबाही ही होता है. पीएम और उनकी सरकार को यह सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक इंतज़ाम करने चाहिए कि हमारे पास ईंधन का पर्याप्त भंडार हो, और उनकी खराब योजना के चलते किसी भी नागरिक को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े.’
पीएम की अपील के बाद समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि चुनाव ख़त्म होते ही संकट याद आ गया.
अखिलेश यादव ने एक्स पोस्ट में लिखा, ‘सोना न ख़रीदने की अपील जनता से नहीं, भाजपाइयों को अपने भ्रष्ट लोगों से करनी चाहिए क्योंकि जनता तो वैसे भी 1.5 लाख रुपये तोले का सोना नहीं ख़रीद पा रही है. भाजपाई ही अपनी काली कमाई का स्वर्णीकरण करने में लगे हैं.’
उन्होंने लिखा, ‘वैसे सारी पाबंदियां चुनाव के बाद ही क्यों याद आईं हैं? भाजपाइयों ने चुनाव में जो हज़ारों चार्टर हवाई यात्राएं कीं, वो क्या पानी से उड़ रहीं थीं? वो क्या होटलों में नहीं ठहर रहे थे या सिलेंडर की फ़ोटो लगाकर खाना बनाकर खा रहे थे? भाजपाइयों ने चुनाव में वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग से प्रचार क्यों नहीं किया? इस तरह की अपील से तो व्यापार-कारोबार-बाज़ार में मंदी या महंगाई की आशंका की वजह से डर के साथ घबराहट, बेचैनी, निराशा फैल जाएगी. सरकार का काम अपने अकूत संसाधनों का सदुपयोग करके आपातकालीन हालातों से उबारना होता है, भय या अफ़रातफ़री फैलाना नहीं.’
बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राजद नेता तेजस्वी यादव ने भी प्रधानमंत्री के बयान की आलोचना की है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राष्ट्र से अपील पर राजद सांसद मनोज कुमार झा ने कहा, ‘क्या ढाई महीने पहले कोई और प्रधानमंत्री था? या उन्हें अब जाकर एहसास हुआ है कि वे देश के प्रधानमंत्री हैं? 28 फरवरी से ही वैश्विक उथल-पुथल मची हुई है. प्रधानमंत्री बयानबाजी की सारी हदें पार कर रहे हैं. क्या वे पांच चुनाव खत्म होने का इंतजार कर रहे थे? इन ढाई से तीन महीनों में आपकी तरफ से किसी ने भी गंभीरता नहीं दिखाई. बल्कि, जब भी हममें (विपक्ष) से किसी ने सवाल उठाए, तो आप कहते थे, ‘पैनिक मत फैलाइए.’ यह स्थिति रातोंरात नहीं बनी…’
पेट्रोल और डीजल का कम उपयोग करने
पीएम मोदी ने अपने भाषण में लोगों से एक बड़ा संकल्प लिया कि वे पेट्रोल और डीजल का संयमित उपयोग करें. उन्होंने आगे कहा कि जिन शहरों में मेट्रो रेल सेवा उपलब्ध है, वहां के लोगों को यह तय करना चाहिए कि वे केवल मेट्रो का ही उपयोग करेंगे. इसके अलावा यदि कार से यात्रा करना जरूरी है, तो लोगों को कारपूलिंग का प्रयास करना चाहिए और इलेक्ट्रिक गाड़ियों का अधिक प्रयोग किया जाना चाहिए.
मालूम हो कि 2020 में मेट्रो रेल सेवा 18 शहरों में उपलब्ध थी और अब (मार्च 2026) यह 20 शहरों में उपलब्ध है, जो लगभग 1,095 किलोमीटर के क्षेत्र को कवर करती है.
प्रधानमंत्री ने कहा कि माल परिवहन के लिए लोगों को रेलवे की मालगाड़ियों का उपयोग करने का प्रयास करना चाहिए, ताकि जीवाश्म ईंधन की खपत कम हो सके. भारत अपनी कच्चे तेल की 85% से अधिक आवश्यकता आयात करता है, जिससे अर्थव्यवस्था वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो जाती है.
कार्यालय कर्मचारियों और कामगारों के लिए
कोविड-19 महामारी का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने लोगों को घर से काम करने, ऑनलाइन मीटिंग और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की याद दिलाई, जो भारत में लंबे लॉकडाउन के दौरान आम बात हो गई थी.
उन्होंने अपने भाषण में कहा कि भारतीयों ने ऐसी कई ऑनलाइन सेवाओं को ‘लोकप्रिय’ बनाया और और हम इनके आदी भी हो गए!’ आज उन्होंने कहा कि इन सेवाओं को फिर से शुरू करना समय की मांग है और यह राष्ट्रहित में होगा.
पीएम ने आगे कहा कि आज भारत जिस संकट का सामना कर रहा है, उसमें लोगों को इन बदलावों को बड़े पैमाने पर लागू करने पर ध्यान देना चाहिए.
प्रधानमंत्री ने दुनिया भर में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों का जिक्र करते हुए कहा कि महंगे ईंधन की खरीद में खर्च हो रही विदेशी मुद्रा को बचाना अब नागरिकों की सामूहिक जिम्मेदारी है.
उन्होंने कहा, ‘पेट्रोल और डीजल बचाकर हम अपने विदेशी मुद्रा भंडार को बचा सकते हैं. छोटे-छोटे कदम भी देश के लिए बहुत फायदेमंद साबित होंगे.’
मध्यम वर्ग की संस्कृति और सोने की खरीद पर अंकुश लगाएं
प्रधानमंत्री के अनुसार, मध्यम वर्ग में विदेश में छुट्टियां मनाने, यात्रा करने और विदेश में शादी करने की संस्कृति विकसित हो गई है. उन्होंने कहा कि चूंकि वर्तमान समय संकट का दौर है, इसलिए लोगों को देश प्रेम के लिए कम से कम एक वर्ष के लिए विदेश जाने का विचार स्थगित कर देना चाहिए.
उन्होंने सुझाव दिया, ‘भारत में बहुत सारी जगहें हैं – हम वहां जा सकते हैं!’
प्रधानमंत्री ने लोगों से सोने की खरीद से बचने का भी आग्रह किया, चाहे वह मूल्य के भंडार के रूप में हो या आभूषण के रूप में. उन्होंने कहा कि सोने की खरीद से विदेशी मुद्रा भंडार में भारी कमी आती है, और लोगों को उस समय की याद दिलाई जब लोग संकट के समय में अपनी सोने की संपत्ति दान कर देते थे.
उन्होंने कहा, ‘आज ऐसे दान की कोई आवश्यकता नहीं है, लेकिन देश के हित में हमें यह तय करना होगा कि एक वर्ष तक हम परिवार में किसी भी समारोह या कार्यक्रम के लिए सोना नहीं खरीदेंगे और न ही उपहार में देंगे.’
उल्लेखनीय है कि संयमित उपभोग की यह अपील ऐसे समय में आई है जब घरेलू उपभोग भारत की आर्थिक वृद्धि का एक प्रमुख चालक बना हुआ है. आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में बताया गया है कि निजी अंतिम उपभोग व्यय सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 60% से अधिक है.
इसके अलावा भारत के कुल आयात बिल में सोने का हिस्सा लगभग 5% है, और देश ने वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 71.98 अरब अमेरिकी डॉलर का सोना आयात किया.
हालांकि, पश्चिम एशिया संकट के कारण सोने की कीमतों में तेजी से वृद्धि के चलते मात्रा के हिसाब से सोने के आयात में लगभग 5% की गिरावट आई, जो 2024-25 में 757.09 टन से घटकर 721.03 टन हो गया.
तांबा आयात बिल के लिए श्रमिक जिम्मेदार
प्रधानमंत्री ने भारत की तांबे पर निर्भरता का जिक्र करते हुए इस स्थिति के लिए श्रमिकों को जिम्मेदार ठहराया. मोदी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वे किन तांबा संयंत्रों या हड़तालों का जिक्र कर रहे थे, जब उन्होंने कहा, ‘हड़तालों के कारण भारत में तांबा संयंत्र बंद हो गए हैं और अब हालात ऐसे हैं कि विदेशी मुद्रा तांबे के आयात पर खर्च हो रही है. और मुद्रा भंडार भी इसी पर खर्च हो रहा है.’
2018 में, तमिलनाडु में वेदांता स्टरलाइट कॉपर संयंत्र को पर्यावरण प्रदूषण के खिलाफ स्थानीय निवासियों के विरोध प्रदर्शन के बाद बंद कर दिया गया था. उसी वर्ष थूथुकुडी में स्टरलाइट विरोधी प्रदर्शनों के दौरान पुलिस फायरिंग में तेरह लोग मारे गए थे.
उन्होंने श्रमिक संगठनों से अपील की कि वे इस बात को ध्यान में रखें कि भारत के आत्मनिर्भर बनने में बाधा डालने वाली किसी भी चीज से उन्हें खुद को दूर रखना होगा.
उन्होंने कहा, ‘और जो लोग ऐसी साजिशों में शामिल हैं, उन पर भी कड़ी नजर रखनी होगी.’
खाना पकाने के तेल की खपत कम करें
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के खाना पकाने के तेल के आयात से देश को भारी नुकसान होता है और कहा कि जो परिवार खाना पकाने के तेल का उपयोग करते हैं, उन्हें इसकी खपत कम करनी चाहिए, यदि संभव हो तो केवल 10% तक, ताकि देश के खजाने और परिवार के स्वास्थ्य में सुधार हो सके.
उन्होंने कहा, ‘अगर हम तेल का कम उपयोग करना शुरू कर दें, तो यह भी देश के लिए एक बड़ा योगदान होगा.’
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के सितंबर 2021 के प्रेस नोट के अनुसार, भारत अपने खाद्य तेल का 60% आयात करता है, जिससे प्रधानमंत्री द्वारा प्रस्तावित उपायों के संभावित प्रभाव के बारे में स्पष्टता नहीं है.
ऊर्जा सुरक्षा का जिक्र करते हुए उन्होंने खाना पकाने के गैस सिलेंडरों पर चर्चा नहीं की, जिनकी अनुपलब्धता को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों से शिकायतें आ रही हैं.
उर्वरकों का उपयोग कम करें, प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ें
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों पर आयात निर्भरता धरती मां और कृषि क्षेत्रों को नुकसान पहुंचा रही है, जिससे किसानों और लोगों के स्वास्थ्य को खतरा है. उन्होंने कहा, ‘हमें रासायनिक उर्वरकों का उपयोग 25-30-40-50% तक कम करना चाहिए.’
उन्होंने प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने का समर्थन करते हुए कहा, ‘इसे कम करें, आधा कर दें.’
केंद्र सरकार के अनुसार, भारत अभी भी फॉस्फेटिक और पोटैशियम युक्त उर्वरकों और उनके कच्चे माल के लिए आयात पर अत्यधिक निर्भर है. भारत की युवा और बढ़ती आबादी की जरूरतों को पूरा करने के लिए उर्वरकों पर सब्सिडी भी दी जाती है.
मोदी ने कहा कि भारत को विदेशों से आने वाली चुनौतियों का सामना करना होगा और उन्होंने डीजल जनरेटर के स्थान पर खेतों में सौर पंप लगाने के भारत सरकार के कार्यक्रम का उल्लेख किया.
जूते, बैग, पर्स का आयात बंद करें
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीयों को जूते, बैग और पर्स सहित सभी प्रकार की घरेलू वस्तुएं खरीदनी चाहिए. उन्होंने कहा, ‘मैं यह नहीं कह रहा हूं कि आप अपने पास मौजूद विदेशी वस्तुओं को फेंक दें, हमें बस नए विदेशी सामान खरीदना बंद कर देना चाहिए.’
ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब भारत ने हाल के महीनों में कई देशों और व्यापारिक गुटों के साथ व्यापार समझौते किए हैं, जिससे सीमा पार व्यापार बढ़ा है और आयातित वस्तुओं पर शुल्क कम हुआ है.
यह भाषण उन तमाम विषयों को दोहराता है जिनका जिक्र केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री ने कोविड-19 महामारी के दौरान आत्मनिर्भर भारत कार्यक्रम शुरू करने के बाद से बार-बार किया है.